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    कलिमा ला इलाहा इल्लल्लाह इस्लाम और एकेश्वरवाद का सूत्र है, इसी कलिमा के लिए अल्लाह तआला ने आकाश व धरती और मानव जाति क रचना की, इसी के कारण स्वर्ग और नरक को पैदा किया गया और इसी के कारण लोग मोमिन और काफिर में विभाजित हो गए। तथा सभी ईश्दूतों ने इसी की ओर सर्व प्रथम निमंत्र दिया। किंतु आज मुसलमानों की स्थति बहुत दयनीय है उनकी बहुमत शिर्क में लिप्त है। अतः इस पुस्तक में तौहीद (एकेशेवरवाद) का महत्व़, उसकी प्रतिष्ठा तथा शिर्क और उसकी बुराई का उल्लेख करते हुए उससे बचने का आह्वान किया गया है। दुनिया के विभिन्न देशों में शिर्क के प्रचलित रूपों का वर्णन किया गया है। इसी तरह शिर्क फैलने के साधनों, एकेश्वरवाद से संबंधित अनेकेश्वरवादियों के संदेहों का उत्तर देते हुऐ शिर्क से दूर रहने का आह्व किया गया है।

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