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    शुद्ध अक़ीदा और उसके विरुद्ध चीज़ें- शुद्ध अक़ीदा ही इस्लाम धर्म का मूल तत्व और मिल्लत का आधार है, इसी के साथ पवित्र कुरआन अवतरित हुआ और अल्लाह तआला ने अपने ईश्दूत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को भेजा. तथा कोई भी कथन और कर्म उस समय तक शुद्ध और स्वीकार नहीं हो सकता जब तक कि वह शुद्ध अक़ीदा पर आधारित न हो। प्रस्तुत पुस्तक में किताब व सुन्नत से प्रमाणित शुद्ध अक़ीदा का उल्लेख किया गया है जिस पर ईमान लाना और उस पर सुदृढ़ रहना अनिवार्य है, तथा उसके विरुद्ध और विपरीत अक़ीदों का वर्णन करके उनसे सावधान किया गया है।

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    प्रस्तुत पुस्तिका में इस्लाम के अंदर हराम उन चीज़ों का उल्लेख किया गया है जिनका निषिद्ध होना क़ुर्आन व हदीस की स्पष्ट दलीलों से प्रमाणित है, जबकि बहुत से लोग उन्हें तुच्छ समझते हैं और बहुत से मुसलमानों के बीच उनका व्यापक प्रचलन है।

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    क़ुर्आन को समझने के लिए संछिप्त कोर्सः क़ुर्आन और नमाज़ को समझने की शुरूआत करने के लिए एक शार्ट कोर्स, क़ुर्आन में बाहुल्य रूप से आने वाले एक सौ मुख्य शब्दों का ज्ञान प्राप्त करके, उनका अर्थ ससझकर और उन्हें याद करने की मदमद से। यह शार्ट कोर्स टेक्सट बुक, वर्क बुक, आडियो और प्रति पाठ के पावर प्वाइंट प्रीज़ेंटेशन पर आरधारित है। इसका उद्देश्य यह है कि क़ुर्आन को समझना आसान लगने लगे, प्रोत्साहन मिले, आगे की तालीम मज़ीद आसान हो, क़ुर्आन की आयतों में मननचिंतन का रास्ता हमवार हो। यह कोर्स प्रारंभ करने वालों के लिए है, इसके बाद बेसिक कोर्स है जिसमें कुछ विस्तार है।

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    इस्लाम और मानव समाजः इस्लाम जहाँ एक तरफ मानव की उत्पत्ति की वास्तविकता, इस संसार में उसके उद्देश्य, अपने पालनहार के प्रति उसके कर्तव्यों को स्पष्ट करता है, वहीं दूसरी ओर उस समाज के प्रति भी मार्गदर्शन करता है जिसमें मनुष्य जीवन यापन करता है। इस्लाम उसे शांतिपूर्ण और सौभाग्यपूर्ण जीवन जीने के लिए एक संपूर्ण जीवन-व्यवस्था प्रदान करता है, जिसका पालन करके वह इस संसार के तत्वपश्चात परलोक में भी सौभाग्य से सम्मानित होगा। प्रस्तुत पुस्तक में इस्लाम के संछिप्त परिचय के साथ जीवन के प्रति उसके दृष्टिकोण को स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है।

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    इस्लाम और वैश्विक भाईचाराः इस पुस्तक में इस्लाम में एक ऐसे भाईचारा –बंधुत्व- पर चर्चा किया गया है जो सर्व मानवजाति को सम्मिलित है, जिसका आधार लिंग, या राष्ट्र, या रंग, या नस्ल . . . इत्यादि पर नहीं, बल्कि इसका आधार मात्र एक सृष्टा, एक परमेश्वर और एक पूज्य पर विश्वास रखने और केवल उसी की उपासना व आराधना करने पर आधारित है। इसके प्रथम भाग में उन तत्वों और कारणों का उल्लेख किया गया है जो वैश्विक भाईचारा के लिए आवश्यक अंश हैं, और यह केवल एकेश्वरवाद के आधार पर ही संभावित है जिसकी शिक्षा सभी धर्मों ने दिया है। इसके दूसरे भाग में इस्लाम और वैश्विक भाईचारा से संबंधित 14 प्रश्नों के उत्तर प्रस्तुत किए गए हैं। यह इ-बुक हिन्दी बलागर उमर केरानवी साहब का सुप्रयास है।

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    क़ुर्आन और नमाज़ को सझना शुरू कीजिएः क़ुर्आन और नमाज़ को समझने की शुरूआत करने के लिए एक शार्ट कोर्स, सूरतुल फातिहा, 6 सूरतें, नमाज़ के अज़कार और चंद दुआओं वग़ैरह की मदद से 100 मुख्य शब्दों को सझना और याद रखना जो क़ुर्आन में लगभग 40,000 बार आये हैं (कुल लगभग 77,800 में से), अर्थात् क़ुर्आन के 50 प्रतिशत शब्द!!! इसका उद्देश्य यह है कि क़ुर्आन को समझना आसान लगने लगे, प्रोत्साहन मिले, आगे की तालीम मज़ीद आसान हो, क़ुर्आन की आयतों में मननचिंतन का रास्ता हमवार हो।

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    आसान क़ुर्आनिक कोशः क़ुर्आन करीम मानवता के नाम अल्लाह का अंतिम संदेश है जिसमें परलोक तक के लिए आने वाली मानवजाति के लिए सांसिरक जीवह में कल्याण, सफलता और सौभाग्या तथा परलोक में मोक्ष का मार्गदर्शन है। इसलिए सर्व मनुष्य के लिए इसके संदेश को समझना अति आवश्यक है जिसे उसके सृष्टा व पालनकर्ता ने भेजा है। प्रस्तुत पुस्तक हिंदी भाषियों को उनके पालनहार के अंतिम संदेश और मार्गदर्शन से अवगत कराने का एक सराहनीय प्रयास है। यह पुस्तक या कोश तीह भागों में विभाजित है, प्रथम भाग मे प्रति दिन पढ़ी जाने वाली छोटी सूरतों, नमाज़ की दुआओं, सुबह शाम ... इत्यादि की दुआओं का अनुवाद प्रस्तुत किया गया है। जबकि दूसरे भाग में बेसिक अरबी व्याकरण का उल्लेख किया गया है। तीसरे और अंतिम भाग में पूरे क़ुर्आन के कठिन शब्दों का अर्थ वर्णन किया गया है।

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    क्या क़ुरआन ईश्वरीय ग्रंथ हैॽ इस पुस्तक में सतर्क यह वर्णन किया गया है कि क़ुरआन करीम सर्व मानवजाति के लिए अल्लाह का अंतिम ग्रंथ है, जिसे अल्लाह ने मानवता के मार्गलर्शन के लिए अपने अंतिम संदेष्टा मुहम्मद पर अवतरित किया है और इसकी रक्षा का वादा किया है। इसके साधन और स्रोत के बारे में लोगों के अंदर जो गलत धारणायें और विचार पाए जाते हैं उनका सतर्क खण्डने करते हुए वैज्ञानिक प्रमाणों द्वारा इस बात को प्रमाणित किया गया है कि क़ुरआन ईश्वरीय ग्रंथ है, किसी मानव का कलाम हो ही नहीं सकता। किताम के अंतिम भाग में क़ुरआन और इस्लाम के बारे में विभिन्न प्रश्नों के उत्तर प्रस्तुत किए गए हैं। यह इ-बुक हिन्दी बलागर उमर केरानवी साहब का सुप्रयास है।

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    इस्लाम में औरतों के अधिकारः इस पुस्तक में इस्लाम में औरतों के अधिकारों का वर्णन और उसके प्रति व्यक्त किए जाने वाले संदेहों का निराकरण किया गया है, इसके प्रथम भाग में इस्लाम में औरतों के धार्मक, आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक, क़ानूनी और राजनीतिक अधिकारों पर बात की गई है, जबकि दूसरे भाग में इस्लाम में औरतों के अधिकार संबंधित 25 प्रश्नों के उत्तर प्रस्तुत किए गए हैं। यह इ-बुक हिन्दी बलागर उमर केरानवी साहब का सुप्रयास है।

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    क़ुरआन मजीद अंतिम ईशग्रंथः क़ुरआन अल्लाह की अंतिम किताब है जिसे उसने सर्व मानव-जाति के मार्गदर्शन के लिए अवतिरित किया है। यह किताब लोक-परलोक में सफलता और सौभाग्या का मार्ग दर्शाती है। प्रस्तुत पुस्तक में सतर्क औऱ स्पष्ट रूप से इस तथ्य का वर्णन किया गया है कि क़ुरआन एक ईश्वरीय ग्रंथ है, कोई मानव रचित पुस्तक नहीं है। मानव जीवन जिन विभिन्न समस्याओं से जूझ रहा है उनका एकमात्र समाधान इसी अंतम ईशग्रंथ में है, जिसके अंदर मानवता के लिए एक संपूर्ण जीवन प्रणाली, नियम और संविधान प्रस्तुत किया गया है, और इस कारण कि यही अंतिम ईशग्रंथ है जो हर प्रकार से सुरक्षित है क्योंकि इसका रक्षक स्वयं अल्लाह तआला है, जबकि इससे पुर्व के सभी ग्रंथ परिवर्तित कर दिए गए – यही मानवता के लिए लोक एवं परलोक में सफलता, सौभाग्य और मोक्ष प्राप्त करने का एकमात्र साधन है। इस ग्रंथ की प्रामाणिकता वैज्ञानिक प्रमाणों से भी सिद्ध है और वह अपने अवतरण के समय से आज तक चुनवती बना हुआ है और रहती दुनिया तक यह चुनौती निरंतर बाक़ी है कि कोई व्यक्ति इसके समान कुछ छंद भी प्रस्तुत नहीं कर सकता। तथा इस पुस्तक में यह तथ्य भी स्पष्ट किय गया है कि बहुत से लोग ईश्वर में विश्वास रखते है परंतु ईश्वर के बारे में उनकी कल्पनाओ का कोई विश्वसनीय आधार नहीं है, ईश्वर का स्पष्ट तसव्वुर और उसके गुण विशेषण की व्याख्या क़ुरआन में प्रस्तुत किया गया है, जिसकी जानकारी इस पुस्तक में दी गई है।

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    पवित्र क़ुरआन के अंतिम तीन पारों की व्याख्या तथा मुसलमामों के लिए महत्वपूर्ण प्रावधानः यह एक संछिप्ति पुस्तक है जो मुसलमान के लिए उसके जीवन संबंधी आवश्यक और महत्वपूर्ण प्रावधानों पर आधारित है जैसे – क़ुरआन, तफ्सीर, सैद्धांतिक और शास्त्रीय प्रावधान, गुण इत्यादि। यह किताब दो भागों में विभाजित है: पहला शैख मुहम्मद अल-अश्क़र की किताब “ज़ुब्दतुत तफ्तीस” से क़ुरआन के अंतिम तीन पारों की व्याख्या, तथा दूसरा भाग मुसलमामों के लिए महत्वपूर्ण अहकाम पर आधारित हैः तज्वीद के अहकाम, अक़ीदा के विषय में 62 प्रश्न, एकेश्वरवाद पर एक शांत बातचीत, इस्लाम के प्रावधानः [आस्था, पवित्रता, नमाज़, ज़कात़, रोज़ा, हज्ज], विभिन्न लाभदायक बातें, अज़कार, वुज़ू और नमाज़ का चित्रित तरीक़ा, प्रार्थना, झाड़-फूँक, अंतिम यात्रा इत्यादि।

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    क़ुरआन अल्लाह किताब है जिसे उसने सर्व मानव-जाति के मार्गदर्शन के लिए अवतिरित किया है। यह किताब लोक-परलोक में सफलता और सौभाग्या का मार्ग गर्शाती है तथा मनुष्य को अपने अस्तित्व और इस ब्रहमांड के प्रति अनेक प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर प्रदान करती है। जैसे- मनुष्य कहाँ से आया है? उसे कहाँ जाना है? उसके जीवन का उद्देश्य क्या है? उसे प्राप्त करने का सायधन क्या है? मृत्यु के बाद क्या होगा? इत्यादि। प्रस्तुत पुस्तक में मानव जीवन उसके विभिन्न पक्षों से संबंधित सैंकड़ों प्रश्नों के क़ुरआन से उत्तर प्रस्तुत किए गए हैं, जिनके अध्ययन से पाठक को इस बात की जानकारी होती है कि क़ुरआन ने सौभाग्य जीवन का क्या मार्ग दर्शाया है।

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    कलिमा ला इलाहा इल्लल्लाह इस्लाम और एकेश्वरवाद का सूत्र है, इसी कलिमा के लिए अल्लाह तआला ने आकाश व धरती और मानव जाति क रचना की, इसी के कारण स्वर्ग और नरक को पैदा किया गया और इसी के कारण लोग मोमिन और काफिर में विभाजित हो गए। तथा सभी ईश्दूतों ने इसी की ओर सर्व प्रथम निमंत्र दिया। किंतु आज मुसलमानों की स्थति बहुत दयनीय है उनकी बहुमत शिर्क में लिप्त है। अतः इस पुस्तक में तौहीद (एकेशेवरवाद) का महत्व़, उसकी प्रतिष्ठा तथा शिर्क और उसकी बुराई का उल्लेख करते हुए उससे बचने का आह्वान किया गया है। दुनिया के विभिन्न देशों में शिर्क के प्रचलित रूपों का वर्णन किया गया है। इसी तरह शिर्क फैलने के साधनों, एकेश्वरवाद से संबंधित अनेकेश्वरवादियों के संदेहों का उत्तर देते हुऐ शिर्क से दूर रहने का आह्व किया गया है।

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    इस पुस्तक में इस्लाम का अर्थ और उसकी वास्तविकता, अल्लाह के आदेश और उसकी शरीअत की जानकारी के साधन, ईश्दूतों और उनकी सत्यता के प्रमाणों का ज्ञान, इस्लाम और ईमान के स्तंभों का वर्णन, इस्लामी शरीअत के स्रोत और बंदों पर अनिवार्य कर्तव्यों का वर्णन किया गया है, तथा इस बात का उल्लेख किया गया है कि शरीअत को लागू करना अल्लाह की उपासना है और उसने मानव की पाँच आवश्यक ज़रूरतों की रक्षा की है।

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    यह पुस्तिका इस्लाम के द्वितीय स्तंभ नमाज़ के बारे में एक संछिप्त लेखन है जिसमें नमाज़ के महत्वपूर्ण नियमों का क़ुरआन व हदीस के प्रमाणों सहित उल्लेख किया गया है तथा विस्तृत मसाइल और मतभेद वाले मुद्दों से उपेक्षा किया गया है ताकि साधारण मुसलमानों के लिए उससे लाभ उठाना आसान हो जाए। चुनांचे इसमें इस्लाम के स्तंभ, इस्लाम में नमाज़ का महत्व, पवित्रता- स्नान, वुज़ू और तयम्मुम, फर्ज़ नमाज़ों की समयसारणी और रक्अतों की संख्या, नमाज़ का तरीक़ा, जमाअत की नमाज़, जुमुआ की नमाज़, मुसाफिर की नमाज़, मस्नून दुआयें और सुन्नते मुअक्कदह का वर्णन किया गया है।

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    ईश्दूत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह के अंतिम संदेष्टा हैं जिन्हें अल्लाह सर्व मानव जाति की ओर अपना संदेश्वाहक बनाकर भेजा है। अतः आप केवल मुसलमानों के लिए आदर्श नहीं हैं बल्कि परलोक के दिन तक आने वाली सर्वमानव जाति के लिए मार्गदर्शक और सर्वश्रेष्ठ आदर्श हैं। इस पुस्तिका में पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के जीवन और धर्म संदेश के कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओ पर संछिप्त के साथ प्रकाश डाला गया है।

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    यह पुस्तक उस तौहीद (एकेश्वरवाद) की वास्तविकता को स्पष्ट करती है जिसके साथ अल्लाह ने समस्त संदेष्टा को अवतरित किया, तथा इस एकेश्वरवाद के विषय में अनेकेश्वरवादियों की ओर से व्यक्त किए जाने वाले संदेहों का खंडन करती है। लेखक ने इसमें तौहीद एवं शिर्क का अर्थ और उनके भेद, धरती पर घटित सर्वप्रथम शिर्क की घटना, तथा संसार में प्रचलित शिर्क के विभिन्न रूपों और इस समुदाय में शिर्क की बाहुल्यता एवं उसके पनपने के कारणों वर्णन किया है। उन्हीं में से एक व्यापक कारण वे संदेह हैं जिनका अनेकेश्वरवादी आश्रय लेते हैं और इस घोर पाप के लिए उन्हें अपना आधार मानते हैं। लेखक ने ऐसे 12 संदेहों का उल्लेख कर उनका स्पष्ट सत्तर दिया है। अंत में इस घोर पाप को करने वाले के भयंकर और दुष्ट परिणामों का चर्चा करते हुए इस से सावधान किया है।

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    यह पुस्तक इस्लाम धर्म का परिचय प्रस्तुत करती है जिस पर अल्लाह ने धर्मों का अंत कर दिया है और उसे अपने समस्त बंदों के लिए पसंद कर लिया है तथा इस धर्म में प्रवेश करने का आदेश दिया है। अतः यह मानवजाति की उत्पत्ति की कहानी, संदेष्टाओं व ईश्दूतों के अवतरण, अंतिम संदेष्टा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के ईश्दूतत्व, आपकी संछिप्त जीवनी, आचरण व व्यवहा, तथा आपके ईश्दूतत्व की सत्यता पर अंग्रेज़ दार्शनिक थामस कार-लायल की गवाही के वर्णन पर आधारित है। इसी तरह इसमें इस्लाम की विशेषताओं एवं गुणों, इस्लाम के स्तंभों, ईमान अथवा इस्लामी आस्था के मूलसिद्धांतों, इस्लाम में उपासना के आशय तथा नारी सम्मान और उसके स्थान का उल्लेख किया गया है। इसके अध्ययन से आपके लिए इस धर्म की महानता, उसकी शिक्षाओं की सत्यता व सत्यापन और प्रति युग, स्थान, जाति और राष्ट्र के लिए उसकी योग्यता स्पष्ट होजायेगी।

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    इस पुस्तिका में इस्लामी अक़ीदा से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण मसाइल को प्रश्न-उत्तर के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ये मसअले शैख मुहम्मद जीमल ज़ैनू की पुस्तक (अल-अक़ीदा अल-इस्लामिय्या मिनल किताबि वस्सुन्नतिस्सहीहा) से संकलित किए गए हैं। इसमें शिर्क, तौहीद, जादू, वसीला, दुआ, तसव्वुफ, क़ब्रों की जि़यारत और उस पर सज्दा करना और उसे छूना इत्यादि जैसे मसाइल पर चर्चा किया गया है।

  • ज़कात हिन्दी

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    "ज़कात" इस्लाम के पाँच मूल स्तंभों में से एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जिसका इस्लाम में एक महान स्थान है। अल्लाह तआला ने क़ुरआन करीम में 32 स्थानों पर इसका वर्णना किया है जिनमें से 27 स्थानों पर उसे नमाज़ के साथ उल्लेख किया है। तथा ज़कात की उपेक्षा करने वाले पर कड़ी चेतावनी आई है और उसे भयंकर यातना की धमकी दी गयी है। प्रस्तुत पुस्तिका इस विषय पर एक महत्वपूर्ण लेख है जिसमें ज़कात के महत्व, उसकी विशेषता, प्रतिष्ठा, तत्वदर्शिता, निसाब, मात्रा, तथा उसके अधिकृत लोगों का वर्णन करते हुए उसकी अदायगी न करने वाले पर चेतावनी और ज़कातुल-फित्र एंव ज़कात से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण मसाइल पर चर्चा किया गया है।

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