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    वेलेंटासबसे बड़ा व सबसे महत्वपूर्ण काम अल्लाह सर्वशक्तिमाम का एकेश्वरवाद (तौहीद), और उसके साथ किसी को साझी न ठहराना है। यही इस्लाम धर्म की नींव और मौलिक सिद्धांत है। तथा यही सर्वप्रथम संदेष्टा नूह अलैहिस्सलाम से लेकर अंतिम संदेष्टा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम तक सभी संदेष्टाओं का धर्म रहा है। आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इस एकेश्वरवाद को स्थापित करने के लिए भरपूर संघर्ष किया और इसके महत्व को स्पष्ट किया। जबकि दूसरी तरफ, इसके विपरीत अनेकेश्वरवाद व बहुदेववाद से सावधान किया, उसके सभी रूपों और भेदों पर चेतावनी दी और उसकी कुरूपता व दुष्टता को स्पष्ट किया।

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    यह पुस्तक उस तौहीद (एकेश्वरवाद) की वास्तविकता को स्पष्ट करती है जिसके साथ अल्लाह ने समस्त संदेष्टा को अवतरित किया, तथा इस एकेश्वरवाद के विषय में अनेकेश्वरवादियों की ओर से व्यक्त किए जाने वाले संदेहों का खंडन करती है। लेखक ने इसमें तौहीद एवं शिर्क का अर्थ और उनके भेद, धरती पर घटित सर्वप्रथम शिर्क की घटना, तथा संसार में प्रचलित शिर्क के विभिन्न रूपों और इस समुदाय में शिर्क की बाहुल्यता एवं उसके पनपने के कारणों वर्णन किया है। उन्हीं में से एक व्यापक कारण वे संदेह हैं जिनका अनेकेश्वरवादी आश्रय लेते हैं और इस घोर पाप के लिए उन्हें अपना आधार मानते हैं। लेखक ने ऐसे 12 संदेहों का उल्लेख कर उनका स्पष्ट सत्तर दिया है। अंत में इस घोर पाप को करने वाले के भयंकर और दुष्ट परिणामों का चर्चा करते हुए इस से सावधान किया है।

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