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    साइट इस्लाम प्रश्न और उत्तर से यह प्रश्न किया गया किः क्या मुहर्रम के महीने के समान सफर के महीने की भी कोई विशेषता है? आशा है कि इस पर विस्तार के साथ प्रकाश डालेंगे। तथा मैं ने कुछ लोगों से सुना है कि वे इस महीने से अपशकुन लेते हैं, तो इसका क्या कारण है?

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    यह मुहम्मद अल-हमूद अन्नजदी से पूछा गया एक प्रश्न है, जिसके शब्द यह हैंः ’’कुछ वार्षिक अवसरों और समारोहों जैसे- अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस, अंतरराष्ट्रीय विकलांग दिवस और अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस, इसी तरह कुछ धार्मिक अनुष्ठानों जैसे- इस्रा व मेराज (पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की रातों-रात मक्का से मस्जिदे अक़्सा तक, फिर वहाँ से आकाश तक की यात्रा की सालगिरह), मीलादुन्नबी (पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का जन्म दिवस) और हिज्रत (पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के मक्का से मदीना की ओर प्रवास की सालगिरह) के समारोहों में भाग लेने में शरीअत का क्या हुक्म है? और वह इस प्रकार कि लोगों को याद दिलाने और उन्हें नसीहत (सदुपदेश) करने के लिए व्याख्यान और इस्लामी सेमिनार का आयोजन किया जाए या कुछ पत्रक तैयार किए जाएं।

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    प्रस्तुत वीडियो में रमज़ान के महीने के अहकाम व मसायल से संबंधित 50 प्रश्नों के उत्तर दिए जिनके बारे में अक्सर लोग

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    रमज़ान के महीने में एक मुसलमान को किस तरह रहना चाहिए इसके बारे में साइट इस्लाम प्रश्न और उत्तर से यह प्रश्न किया गया किः रमज़ान के महीने की शुरुआत के शुभ अवसर पर आप मुसलमानों को क्या सदुपदेश देंगे?

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    शबे-बरात की वास्तविकता : वर्तमान समय में मुसलमानों के अंदर बिदनतों का बाहुल्य और भरमार है, जिनके दुष्ट परिणाम उनके जीवन में जगज़ाहिर हैं, जबकि परलोक में उन्हें कठोर अपमान, तिरस्कार और ह़ौज़े-कौसर से निराशा का सामना करना होगा। मुसलमानो में बिदअतों के प्रचलन के कुछ कारण हैं। इस आडियो में कुछ कारणों का उल्लेख करते हुए शाबान के महीने में प्रचलित एक निंदित बिदअत शबे-बरात की हक़ीक़त का खुलासा किया गया है।

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    क्या रगाइब की नामज़ सुन्नत है जिसको पढ़ना मुसतहब है?

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    खाने और पीने के शिष्टाचार : इस्लाम धर्म की महानता और उसके गुणों में से है कि उसने जीवन के पहलुओं में से किसी पहलू को नहीं छोड़ा है मगर उसे संबोधित किया है और उसे स्पष्ट किया है। उन्हीं पहलुओं में से खाने और पीने के शिष्टाचार हैं। प्रस्तुत व्याख्यान में उन शिष्टाचार का उल्लेख किया गया है जो एक मुसलमान को खान पान के समय अपनाना चाहिए।

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    पाखाना पेशाब के आदाबः प्रस्तुत वीडियो में उन शिष्टाचार और कर्यों का उल्लेख किया गया है जो एक मुसलमान को शौच करने के समय अपनाना चाहिए।

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    बात चीत के आदाबः इस्लाम धर्म ने मनुष्य की बात चीत पर बहुत ध्यान दिया है और उसके शिष्टाचार का ख्याल रखा है। चुनाँचे अच्छी बातें कहने का निर्देश दिया है, ज़ुबान का अच्छा प्रयोग करने और बोलने एवं चुप रहने में इस्लामी शिष्टाचार का पालन करने का मार्गदर्शन किया है। तथा उसका निरीक्षण करने में आलस्य व लापरवाही करने से सचेत किया है। इस व्याख्यान में इसका उल्लेख किया गया है।

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    मुलाक़ात के आदाबः प्रस्तुत वीडियो में उन शिष्टाचार का उल्लेख किया गया है जो एक मुसलमान को अपने मुसलमान भाई से मुलाक़ात के समय अपनाना चाहिए। जैसे हँसते हुए चेहरे के साथ मिलना, सलाम करना, हाथ मिलाना, परायी महिला से केवल सलाम करना, उससे न हाथ मिलाना, न उसके साथ एकांत में होना। मुलाक़ात के समय किसी के सम्मान में न झुकना न सज्दा करना। केवब नवागंतुक के लिए सम्मान के तौर पर खड़े हो सकते हैं।

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    अनुमति लेने के आदाबः इस्लामी शरीअत ने हर चीज़ के साथ व्चवहार करने के शिष्टाचार सिखाया है, उनमें से एक किसी ऐसी जगह प्रवेश करने की अनुमति लेना है जिसका आदमी मालिक नहीं है। यह एक ऐसा शिष्टाचार है जो अनुमति लेनेवाले व्यक्ति के शील, सभ्यता, उदारता, शुद्धता को इंगित करता है। जो ऐसी चीज़ को देखने या ऐसी बात सुनने से अपने आपको पवित्र रखता है जो उसके लिए वैध नहीं है। आजके आधुनिक युग में जबकि घरों में दरवाज़े लगे होते हैं, कुछ लोग ऐसे हैं जो बिना अनुमति और अधिसूचना के दूसरों के कमरे या बैठकों में आ धमकते हैं। इसलिए इस्लाम के इस महान आचरण का स्मरण कराना समय की आवश्यकता है। प्रस्तुत व्याख्यान में संक्षेप में इसका उल्लेख किया गया है।

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    दंपती के बीच विवादः दंपती के बीच विवाद अपरिहार्य है, और शायद ही कोई घर है जो इससे खाली हो। लेकिन इस विवाद के कारणों और कारकों को समझकर इन मतभेदों का उचित समाधान खोजना, वैवाहिक किंगडम के अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए सबसे सुरक्षित तरीका है। इस प्रवचन में, दंपती के बीच विवाद के कुछ कारणों और उनके शरई समाधान, तथा वैवाहिक विवाद से निपटने के लिए कुछ सुझावों का वर्णन किया गया है।

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    रोगी के हाल जानने के आदाब : मुसलमान के कर्तव्यों में से एक कर्तव्य अपने मुलमान भाइयों में से बीमार व्यक्ति के पास जाकर उसका हाल पूछना, उसके आरोग्य के लिए प्रार्थना करना, उसे धैर्य दिलाना, उसका दिल बहलाना तथा उसका हौसला और मनोबल बढ़ाना है। प्रस्तुत व्याख्यान में इन्हीं शिष्टाचार का वर्णन किया गया है।

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    सोने के आदाब : प्रस्तुत वीडियो में उन शिष्टाचार और कर्यों का उल्लेख किया गया है जो एक मुसलमान को सोने समय अपनाना चाहिए।

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    मस्जिद जाने के आदाब : प्रस्तुत वीडियो में उन शिष्टाचार और कर्यों का उल्लेख किया गया है जो एक नमाज़ी के लिए मस्जिद की ओर जाते हुए और मस्जिद में प्रवेश करते समय उचित है। इसी तरह उन चीज़ों का उल्लेख किया गया जो मस्जिदों के अंदर वांछित, अथवा अनुमेय या अवैध हैं।

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    यात्रा के शिष्टाचार (सफ़र के आदाब) : प्रस्तुत वीडियो में उन शिष्टाचार का उल्लेक किया गया है जिनका इस्लामी शरीयत ने यात्रा के दौरान पालन करने के लिए आग्रह किया है।

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    मैं हिंद महासागर के एक देश मॉरीशस का रहनेवाला हूँ। कृपया मुझे बतलाएं कि सबसे अच्छा धर्म कौनसा है, हिंदू धर्म या इस्लाम और क्यों? मैं स्वयं एक हिंदू हूँ।

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    मसाहिफ़ हिन्दी

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    हिन्दी भाषा में मसाहिफ़ एप्प, पवित्र क़ुरआन के सस्वर पाठों का एक ऑडियो विश्वकोश है जो आसिम के द्वारा हफ़्स, नाफ़े के द्वारा वर्श तथा नाफ़े के द्वारा क़ालून व अन्य की रिवायत से दर्जनों सुप्रसिद्ध पाठकों को शामिल है। इसी तरह इसमें तज्वीद के साथ सस्वर पाठ तथा एक बड़ी संख्या में (अंग्रेजी, फ्रेंच, उर्दू, इन्डोनेशियाई, आदि) अन्य भाषाओं में अनुवादित क़ुरआन करीम के अर्थों के पाठ भी शामिल हैं। यह एप्प, सस्वर पाठों को सीधा सुनने के साथ-साथ, उन्हें सहेज कर बिना इंटरनेट कनेक्शन के सुनने की सुविधा भी प्रदान करता है।

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    अल्लाह सर्वशक्तिमान ने मनुष्य की रचना कर उन्हें नाना प्रकार के अनुग्रहों से सम्मानित किया है और साथ ही साथ कुछ आदेश और निषेध निर्धारित किए हैं जिनका पालन करना अनिवार्य है। परंतु अज्ञानता के कारण लोगों के अंदर उनके विचार, वचन और कर्म में अनेक ऐसी चीज़ें है प्रचलित हैं जो अल्लाह सर्वशक्तिमान के निकट महा पाप और जघन्य अपराध की श्रेणी में आती हैं। जबकि लोगों का हाल यह है कि वे उन्हें तुच्छ और हल्का समझते हैं, या कुछ लोग उन्हें धर्म का काम समझकर बड़ी आस्था के साथ करते हैं। प्रस्तुत व्याख्यान में उन्हीं हराम चीज़ों का खुलासा करते हुए, उनसे बचने का आह्वान किया गया है।

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    मीलादुन्नबी - कब और कैसी? : प्रस्तुत वीडियो में पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के जन्म दिवस का उत्सव मनाने का धार्मिके प्रावधान उल्लेख करते हुए यह वर्णन किया गया है कि स्वयं पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के समयकाल, आपके खुलफा-ए-राशेदीन के समयकाल तथा उसके बाद की सर्वश्रेष्ठ शताब्दियों में किसी प्रकार का कोई मालीदुन्नबी उत्सव नहीं मनाया गया। सबसे पहले जिन लोगों ने इसका ईजाद किया वे मिस्र में उबैदी (फातिमी शीया) थे। और सुन्नियों में इस नवाचार को फैलाने वाला इर्बिल का शासक शाह मुज़फ्फर था। इसी प्रकार इसको मनाने और इसे वैध समझने वाले लोग जिन प्रमाणों का सहारा लेते हैं उनका विश्लेशण करते हुए उनका उत्तर दिया गया है और उनके कुछ सन्देहों का चर्चाकर उनका खण्डन किया गया है।

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