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    इस्लाम : इस वीडियो में बयान किया गया है कि इस्लाम क्या है? और क्या मानव को इस्लाम की जरूरत है? यह एकेश्वरवाद के साथ अल्लाह के लिए समर्पण, आज्ञाकारिता के साथ उसके अनुपालन और बहुदेववाद एवं बहुदेववादियों से अलगाव का नाम है। तथा इस्लामी धर्म की कुछ विशेषताओं ; न्याय, दया, प्रेम और सहिष्णुता आदि का उल्लेख किया गया है। और यह कि इस्लाम ही लोक परलोक में स्वभाग्य का कारण और पुनर्जन्म में मोक्ष के लिए रास्ता है।

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    ग़ैर-मुस्लिमों के लिए हम इस्लाम की सहिष्णुता को कैसे प्रमाणित करें और यह कि वह एक आसान धर्म है ॽ

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    इस्लाम ही वह एकमात्र सच्चा धर्म है, जिसे अल्लाह तआला ने सर्व मानव जाति के लिए पसंद कर लिया है। अतः वह किसी भी व्यक्ति से इस्लाम के सिवा कोई दूसरा धर्म कदापि स्वीकार नहीं करेगा। इस्लाम मानव के सौभाग्य और सफलता का धर्म है, तथा वही वह धर्म है जिसने मनुष्य के व्यक्तिगत, या पारिवारिक, या सामुदायिक या सर्व मानव जाति से संबंधित मामलों में ऐसे सूक्ष्म आचार और उचित ढंग, तौर-तरीक़े सिखाये हैं जिन से उसका जीवन सुलभ हो सकता है, उसकी खुशी संपन्न हो सकती है और उसको सच्चा सौभाग्य प्राप्त हो सकता है। इस पुस्तक में इस्लाम के उन्हीं कुछ गुणों और विशेषताओं का उल्लेख किया गया है।

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    इस्लाम ही वह सत्य धर्म है जिसे अल्लाह तआला ने अपने बंदों के लिए पसंद फरमाया है, उसी के साथ अपने संदेश्वाहकों को भेजा और अपनी पुस्तकें अवतरित की हैं, तथा रहती दुनिया तक, अल्लाह सर्वशक्तिमान ने उसे हर समय काल और प्रति स्थान के लिए एक सर्वव्यापी धर्म बनाया है, जिसके अतिरिक्त कोई अन्य धर्म वह किसी भी मनुष्य से कदापि स्वीकार नहीं करेगा। अतः सर्व मानव जाति के लिए इस्लाम का अनुसरण और अनुपालन करना अनिवार्य है। क्योंकि इसी के पालन में उनके लिए लोक व परलोक में सफलता, सौभाग्य और मोक्ष की प्राप्ति है। तथा हमारे सृष्टा ने अपने इस धर्म को असंख्य गुणों और विशेषताओं से सुसज्जित किया है, प्रस्तुत भाषण में इस्लाम की कुछ विशेषताओं पर प्रकाश डाला गया है।

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    मुसलमान लोग यह गुमान क्यों करते हैं कि उन्हीं का धर्म सच्चा है? क्या उनके पास इसके संतोषजनक कारण हैं?

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    इस्लाम ही वह एकमात्र सच्चा धर्म है, जिसे अल्लाह तआला ने सर्व मानव जाति के लिए पसंद कर लिया है। अतः वह किसी भी व्यक्ति से इस्लाम के सिवा कोई दूसरा धर्म कदापि स्वीकार नहीं करेगा। इस्लाम मानव के सौभाग्य और सफलता का धर्म है, तथा वही वह धर्म है जिसने मनुष्य के व्यक्तिगत, या पारिवारिक, या सामुदायिक या सर्व मानव जाति से संबंधित मामलों में ऐसे सूक्ष्म आचार और उचित ढंग, तौर-तरीक़े सिखाये हैं जिन से उसका जीवन सुलभ हो सकता है, उसकी खुशी संपन्न हो सकती है और उसको सच्चा सौभाग्य प्राप्त हो सकता है। इस पुस्तक में इस्लाम के उन्हीं कुछ गुणों और विशेषताओं का उल्लेख किया गया है।

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    इस पुस्तक में इस्लाम धर्म की विशेषता तथा इस तथ्य का वर्णन है कि इस्लाम सर्वश्रेष्ठ धर्म है, और यही वह ईश्वरीय धर्म है जिस के बिना किसी भी मनुष्य को सौभाग्य और मोक्ष प्राप्त नही हो सकता। अत: समस्त लोगों पर इस्लाम को स्वीकार करना और उसके अतिरिक्त अन्य धर्मों को त्याग देना अनिवार्य है। जो व्यक्ति इस्लाम को छोड़ कर कोई अन्य धर्म तलाश करे गा, तो अल्लाह तआला उस को कदापि स्वीकार नहीं करे गा। तथा इस बात का उल्लेख है कि बिद्अत बड़े-बड़े गुनाहों से भी अधिक भीषण और भयंकर है, इस लिए बिद्अतों से बचाव करना अविवार्य है। तथा जिस प्रकार आरम्भ में इस्लाम के अनुयायी थोड़े थे उसी प्रकार अन्त में भी इस के मानने वाले कम हो जायें गे, अत: उस समय इस्लाम पर जमे रहने वालों के लिए शुभ सूचना है

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    इस्लाम एक महान ईश्वरीय धर्म है। जिस के शास्त्र अति परिपूर्ण, उत्तम, सर्व श्रेष्ठ और शुद्ध बुद्धि के अति निकट है। इस पुस्तिका में इस्लामी धर्म शास्त्र की विशेषताओं और खूबियों के हवाले से इस्लाम धर्म की महानता का उल्लेख किया गया है।

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    मैं हिंद महासागर के एक देश मॉरीशस का रहनेवाला हूँ। कृपया मुझे बतलाएं कि सबसे अच्छा धर्म कौनसा है, हिंदू धर्म या इस्लाम और क्यों? मैं स्वयं एक हिंदू हूँ।

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    यह पुस्तक सत्य धर्म को पहचानने और उसे स्वीकारने का आमंत्रण देती है क्योंकि वही एक मात्र विकल्प है जो मानवता के लिए लोक एवं परलोक में सफलता, सौभाग्य और नरक से मोक्ष प्राप्त करने का एकमात्र साधन है। प्रस्तुत पुस्तक इस बात पर प्रकाश डालती है कि मानव जाति की रचना का उद्देश्य क्या है - वह एकमात्र अल्लाह सर्वशक्तिमान की उपासना और आराधना है। इसिलए कि वही वास्तव में उपासना के योग्य है क्योंकि वही सबका सृष्टा, रचयिता, पालनकर्ता, व्यवस्थापक है तथा उसके अच्छे अच्छे नाम और सर्वोच्च गुण हैं। मानव जाति को अल्लाह के नियम, आदेशों और उसकी प्रसन्नता की चीज़ों को जानने के लिए संदेष्टा और ईश्दूतों की आवश्यकता होती है। चुनाँचे अल्लाह ने ईश्दूतों को भेजा और उनके साथ किताबें उतारी ताकि वे लोगों को अल्लाह के आदेश और निषेध से अवगत कराएं। उन महान पुरूषों ने अल्लाह के एकेश्वरवाद का आमंत्रण दिया, जिसका उल्लेख पिछले आकाशीय ग्रंथों और हिंदूमत के वेदों में भी मिलता है। सबसे अंतिम ईश्दूत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हैं जिन पर अल्लाह ने अपना अंतिम और अनन्त दिव्य क़ुरआन उतारा जो सर्व मानव जाति के लिए मार्गदर्शक है। जिसका पालन करके ही मनुष्य लोक एवं परलोक में सफलता, सौभाग्य और नरक से मुक्ति प्राप्त कर सकता है। वह सत्य धर्म इस्लाम है जिसे हमारे सृष्टा ने असंख्य गुणों और विशेषताओं से सुसज्जित किया है। अतः आईये इसके पन्नों को पढ़ें और मननचिंतन करें कि क्या यह जीवन असीमित है या उसका कोई अंत है ॽ और मृत्यु के पश्चात क्या होगा ॽ

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    इस्लाम ही एकमात्र धर्म है जिसे अल्लाह तआला ने सर्व मानवजाति के लिए चयन किया है, जिसके अतिरिक्त कोई अन्य धर्म अल्लाह के निकट मान्य नहीं है। तथा इस्लाम ही एकमात्र धर्म है जो हमारी आज की दुनिया की समस्त समस्याओं का समाधान पेश करता है और उसके निर्देशों का पालन करके और उन्हें व्यवहार में लाकर मानवता समस्यारहित जीवन का अनुभव कर सकती है। इस पुस्तक में इस्लाम के अनन्त संदेश, उसकी विशेषताओं और गुणों, तथा जीवन के सभी छेत्रों में उसकी शिक्षाओं, मार्गदर्शनों और निर्देशों का उल्लेख किया गया है।

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    आज लाखों करोड़ों आदमी आग का ईंधन बनने की होड़ में लगे हुए हैं, और ऐसे मार्ग पर चल रहे हैं जो सीधे नरक की ओर जाता है। इस वातावरण में उन तमाम लोगों का दायित्व है जो मानव समूह से प्रेम करते हैं और मानवता में आस्था रखते हैं कि वे आगे आयें और नरक में गिर रहे इंतानों को बचाने का अपना कर्तव्य पूरा करें। यह पुस्तिका इसी संदर्भ में एक अहम प्रयास है जिस में लेखक ने मानवता के प्रति अपने प्रेम और स्नेह के कुछ फूल प्रस्तुत किये हैं और इसके माध्यम से उन्हों ने अपना वह कर्तव्य पूरा किया है जो एक सच्चे मुसलमान होने के नाते हम सब पर है। इस्लाम की दौलत एक बहुत बड़ा धरोहर है जिसे हर एक तक पहुँचाना प्रत्येक सच्चे मुसलमान का कर्तव्य है।

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    इस्लाम कृपा एंव दया का धर्म : यह पुस्तक इस बात प्रकाश डालती है कि इस्लाम कृपा और दया का धर्म है और इस्लाम के पैग़म्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह की ओर से इस भटकती हुई मानवता के लिए करुणा के भण्डार हैं, अतः इस धर्ती पर बसने वाला हर मनुष्य इस्लाम धर्म में दया का पात्र है, चाहे वह नास्तिक ही क्यों न हो!

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    हिन्दू धर्म के अनुयायियों के नाम यह एक इस्लामी निमंत्रण पत्र और संदेश है जिसमें उन्हें उनके वास्तविक पूज्य से अवगत कराते हुए इस्लाम की शिक्षाओं और उसके नियमों का अध्ययन करने और उसमें मनन चिंतन करने का निमंत्रण दिया गया है।

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    क्षमाशीलता अल्लाह के गुणों में से एक महान गुण है, जिसके द्वारा वह अपने भक्तों को क्षमा प्रदान करता है, और उनपर दया करते हुए उनके पापों को शमन कर देता है। तथा वह इस बात को भी पसंद करता है कि लोग एक दूसरे के साथ क्षमाशीलता का व्यवहार करें। चुनांचे पवित्र क़ुरआन में उसने क्षमा करने वालों और गुस्सा पी जाने वालों की सराहना की है और उन्हें अपनी ओर से क्षमा प्रदान करने का वादा किया है। प्रस्तुत लेख में इस्लाम के इसी पक्ष को उजागर करने का प्रयास किया गया है।

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    इस्लाम और मानव समाजः इस्लाम जहाँ एक तरफ मानव की उत्पत्ति की वास्तविकता, इस संसार में उसके उद्देश्य, अपने पालनहार के प्रति उसके कर्तव्यों को स्पष्ट करता है, वहीं दूसरी ओर उस समाज के प्रति भी मार्गदर्शन करता है जिसमें मनुष्य जीवन यापन करता है। इस्लाम उसे शांतिपूर्ण और सौभाग्यपूर्ण जीवन जीने के लिए एक संपूर्ण जीवन-व्यवस्था प्रदान करता है, जिसका पालन करके वह इस संसार के तत्वपश्चात परलोक में भी सौभाग्य से सम्मानित होगा। प्रस्तुत पुस्तक में इस्लाम के संछिप्त परिचय के साथ जीवन के प्रति उसके दृष्टिकोण को स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है।

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    इस्लाम और वैश्विक भाईचाराः इस पुस्तक में इस्लाम में एक ऐसे भाईचारा –बंधुत्व- पर चर्चा किया गया है जो सर्व मानवजाति को सम्मिलित है, जिसका आधार लिंग, या राष्ट्र, या रंग, या नस्ल . . . इत्यादि पर नहीं, बल्कि इसका आधार मात्र एक सृष्टा, एक परमेश्वर और एक पूज्य पर विश्वास रखने और केवल उसी की उपासना व आराधना करने पर आधारित है। इसके प्रथम भाग में उन तत्वों और कारणों का उल्लेख किया गया है जो वैश्विक भाईचारा के लिए आवश्यक अंश हैं, और यह केवल एकेश्वरवाद के आधार पर ही संभावित है जिसकी शिक्षा सभी धर्मों ने दिया है। इसके दूसरे भाग में इस्लाम और वैश्विक भाईचारा से संबंधित 14 प्रश्नों के उत्तर प्रस्तुत किए गए हैं। यह इ-बुक हिन्दी बलागर उमर केरानवी साहब का सुप्रयास है।

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