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    कुरान से अरबी सुलेख और जुज़ अम्म (तीसवाँ पारा) सीखें: डॉ हैस़म सरहान द्वारा लिखित यह पुस्तक हिंदी में है, जिसका उद्देश्य विभिन्न परिस्थितियों का ध्यान रखते हुए क्रमबद्ध ढ़ंग से नस्ख़ लिपि को सिखलाना है, तत्पश्चात तुलनात्मक रूप से कुछ मूल पुस्तकों की लेखनी का अभ्यास कराना है, इसी प्रकार से इस पुस्तक का एक मुख्य उद्देशय “उस़्मानी लिपि” अर्थात वह लिपि जिस में उस़्मान रह़िमहुल्लाह के युग में क़ुरआन -ए- करीम लिखा गया था, उस उस़्मानी लिपि में अम्मा पारा (तीसवाँ पारा) को लिखने का अभ्यास कराना भी है। इस पुस्तक को मजेदार एवं दिलचस्प ढ़ंग से तैयार किया गया है जो बड़े-छोटे एवं अरबी भाषी तथा ग़ैर अरबी भाषी सभी के लिए समान रूप से उपयोगी है।

  • हिन्दी

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    इस लेख में कुरआन का संक्षिप्त परिचय देते हुए उसके अवतरण के आरंभ, उसकी कैफियत, समय, अवतरण की अवधि, उसके संकलन और उसके संरक्षण के लिए अपनाए गए प्रयोजनों और प्रावधानों तथा दुनिया भर में उसके प्रसारण व प्रकाशन और अन्य भाषाओं में उसके अर्थ का अनुवाद किए जाने का उल्लेख किया गया है। इसी तरह क़ुरआन में चर्चित मुख्य विषयों का भी उल्लेख किया गया है।

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