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नमाज़

हर मुसलमान अल्लाह के धर्म में नमाज़ के स्थान, और अल्लाह की शरीअत में उसकी स्थिति से अवगत है। चुनाँचे वह इस्लाम का स्तंभ, कुफ्र और ईमान के बीच अंतर है, इस फाइल में नमाज़ के अहकामः उसका अर्थ, उसका समय, उसकी शर्तें, उसका तरीक़ा, उसके अरकान व वाजिबात और उसकी सुन्नतें, तथा सज्दा सह्व के प्रावधान का उल्लेख है।

आइटम्स की संख्या: 15

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    नमाज़े नबवी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लमः प्रस्तुत पुस्तक नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की नमाज़ के तरीक़े के विषय में सर्वश्रेष्ठ किताबों में से एक है, जिसमें पवित्रता के अहकाम व मसायल, वुज़ू व गुस्ल का तरीक़ा, अज़ान व इक़ामत के नियम, नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की नमाज का संपूर्ण तरीक़ा, और सभी प्रकार के सुनन व नवाफिल नमाज़ों के अहकाम का उल्लेख किया गया है।

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    सलात (नमाज़) का तरीक़ाः इस वीडियो में सलात (नमाज़) पढ़ने का मुकम्मल तरीक़ा वर्णन किया गया है और इबादत के क़बूल होने की शर्तों का उल्लेख किया गया है।

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    इस बारे में बहुत प्रश्न किया जाने लगा है कि यदि ईद का दिन जुमा के दिन पड़ जाए। चुनाँचे दो ईदें एक साथ हो जाएं: ईदुल फित्र या ईदुल अज़हा, जुमा की ईद के साथ एकत्रित हो जाए जो कि सप्ताह की ईद है, तो क्या ईद की नमाज़ में उपस्थित होने वाले पर जुमा की नमाज़ अनिवार्य है या कि ईद की नमाज़ उसके लिए पर्याप्त होगी और वह जुमा के बदले ज़ुहर की नमाज़ प़ढ़ेगा? और क्या मस्जिदों में ज़ुहर की नमाज़ के लिए अज़ान दी जायेगी या नहीं? इसके अलावा प्रश्न में वर्णित अन्य बातें। इस पर वैज्ञानिक अनुसंधान और इफ्ता की स्थायी समिति ने यह फत्वा जारी किया हैः

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    दुश्मनों के क्या अधिकार हैं? अज़ान और नमाज़ के संबंध में अनभिगता के कारण बड़ी भ्रान्तियाँ पाई जाती हैं। यह बात उस समय और दुखद हो जाती है जब बिना सही जानकारी के इस्लाम की इस पवित्र एवं कल्याणकारी उपासना के संबंध में निसंकोच अनुचित टीका-टिप्पणी तक कर दी जाती है और उसके बारे में सही जानकारी प्राप्त करने का कष्ट तक नहीं किया जाता है। बहुत से लोग अज्ञानतावश यह समझते हैं कि अज़ान में ’अकबर बादशाह’ को पुकारा जाता है! कबीरदास जैसे संत तक ने भी अपनी अनभिज्ञता के कारण अज़ान के संबंध में कह डाला: कंकर पत्थर जोर के मस्जिद लिया बनाय । तापे मुल्ला बांग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय ।। इस पुस्तिका में नमाज़ का महत्व और अज़ान तथा नमाज़ का मूल अर्थ बताया गया है। ताकि इनका सही स्वरूप जनसामान्य के सामने आ सके और इनके संबंध में भ्रान्तियाँ दूर हो सकें।

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    मैं सोलह साल की एक लड़की हूँ, और एक ऐसे परिवार से हूँ जो धर्म के प्रति प्रतिबद्ध नहीं हैं, मैं एक अकेली हूँ जो नमाज़ पढ़ती हूँ और इस्लाम की शिक्षाओं का पालन करने का प्रयास करती हूं, इसीलिए मुझे बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, उन्हीं में से यह है कि मेरी माँ मुझे इशा और फज्र की नमाज़ पढ़ने से रोकती है और कहती है कि वे दोनों अनुचित समय में हैं !! इसके बावजूद मैं उन्हें चुपके से पढ़ लेती हूं, और यदि वह मुझसे आकर पूछती है तो मैं कहती हूँ कि: मैं ने नमाज़ नहीं पढ़ी . . . ! तो इस बारे में शरीअत का प्रावधान क्या है ॽ क्या मेरे लिए ऐसी स्थिति में झूठ बोलना जइज़ है ॽ तथा मैं पिज़्ज़ा रेस्तरां में काम करता थी और यह रेस्तरां सूअर बेचता था इसलिए मैं ने उसे छोड़ दिया, और जब उसने मुझसे पूछा तो मैं ने उससे कहा कि उन्हों ने मुझे निकाल दिया है, तो इस स्थिति में भी शरीअत का दृश्य क्या है ॽ एक दूसरा मुद्दा यह है कि मैं अपनी माँ के साथ ट्रेन से एक दूसरे शहर का सफर करने वाली हूँ और ज़ुहर और अस्र की नमाज़ का समय ट्रेन ही में हो जायेगा, और उस समय मेरे लिए उनकी अदायगी करना संभव न होगा, तो फिर क्या करना होगा ॽ मैं ने सुना है कि नमाज़ों को एकत्र करके पढ़ना जाइज़ है, लेकिन मुझे नहीं पता कि कैसे . . .! क्या इसका मतलब यह है कि मेरे लिए ज़ुहर और अस्र की नमाज़ ज़ुहर की नमाज़ के समय पढ़ना संभव है, और इसे कैसे पढ़ा जायेगा ॽ यह बात निश्चित है कि मैं इशा और फज्र की नमाज़ भी पढ़ने पर सक्षम नहीं हूँगी क्योंकि मेरी माँ मेरे साथ होगी, तो फिर क्या करूँ ॽ क्या दूसरे समय में नमाज़ों की क़जा की जायेगी, और कैसे ॽ इसके अलावा, मेरी माँ मुझे हिजाब पहनने से भी रोकती है, और इस बात पर ज़ोर देती है कि मैं ऐसा पोशाक पहनूँ जो उस समाज और वातावरण के अनुकूल हो जिसमें मैं रहती हूँ, उदाहरण के तौर पर गर्मियों में मुझे छोटे कपड़े पहनने पर मजबूर करती है, और कहती है कि सूरज त्वचा के लिए उपयोगी है . . इन सब के बावजूद, मैं इन दबावों का विरोध करती हूँ, और यथा संभव शालीनता अपनाने का प्रयास करती हूँ, . . लेकिन मैं वास्तव में उस समय उदास और दुखी होती हूँ जब मैं अपनी माँ को देखती हूँ कि वह मुझसे गुस्सा करती है, लेकिन मैं भी अपने धर्म के सिद्धांतों को त्याग नहीं कर सकती, तो क्या आप कोई नसीहत करेंगेॽ

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    मैं जिस विश्वविद्यालय में पढ़ता हूँ उसमें हम प्रति वर्ष एक निमंत्रण संबंधी सप्ताह संगठित करते हैं, जहाँ हम विश्वविद्यालय में गैर मुसलमानों को विभिन्न तकनीकों का इस्तेमाल करके आमंत्रित करते हैं। इस वर्ष प्रबंधकों ने एक न्या विचार पेश किया है और उन्हों ने यह प्रस्ताव रखा है कि हम एक नमाज़ मस्जिद के बदले विश्वविद्यालय के एक हॉल में पढ़ें, इसका मक़सद इस्लाम के प्रतीकों का प्रदर्शन है, फिर इसके बाद वे इस्लाम के बारे में अधिक प्रश्न करेंगे, किंतु मैं वास्तव में इस तरीक़े की वैधता से संतुष्ट नहीं हूँ, क्योंकि यदि यह सफल रहा तो आने वाले वर्षों में दोहराया जायेगा। तो इस तरह के काम का क्या हुक्म है ? और क्या अगर यह प्रति वर्ष किया जाये तो बिद्अत की गणना में आयेगा ?

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    जब मैं बच्चा था तो मुझसे बताया गया था कि जब अल्लाह ने इब्लीस को जन्नत से निकाल दिया और जब फरिश्तों ने अल्लाह के सख्त क्रोध को देखा तो वे दुबारा सज्दे में गिर गए, इसी कारण हम नमाज़ में दो बार सज्दा करते हैं, तो क्या इस में कोई सच्चाई है ॽ मैं इसका कोई हवाला (स्रोत) ढूंढ़ने में असमर्थ हूँ, क्या आप कृपया इसका स्पष्टीकरण कर सकते हैं ॽ

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    ला इलाहा इल्लल्लाह व मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह की गवाही के बाद जो सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य एक मुसलमान पर लागू होता है वह पाँच समय की नमाज़ों की पाबंदी है, नमाज़ - कुफ्र व शिर्क और मुसलमान व्यक्ति के बीच अंतर है, नमाज़ - इस्लाम और नास्तिकता के बीच फर्क़ है, नमाज़ ही के बारे में परलोक के दिन सबसे पहले प्रश्न किया जायेगा, नमाज़ ही नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के जीवन के अंतिम क्षणों की वसीयत है, इसके अतिरिक्त यह इसकी पाबंदी करनेवालों के लिए अपने अंदर बहुत सारी विशेषताएं, शुभसूचनाएं और बशारतें रखती है, जो एक मुसलमान को इस पर कार्यबद्ध रहने की प्रेरणा देती हैं। इस लेख में नमाज़ की विशेषताओं से संबंधित कुछ महान शुभसूचनायें, बशारतें प्रस्तुत की गई हैं।

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    यह पुस्तक तहारत और नमाज़ के प्रावधानों और नियमों से संबंधित महत्वपूर्ण संछिप्त लेख है जिसमें लेखक ने पवित्रता और नमाज़ के नियमों को संछेप में वर्णन किया है, पवित्रता के अध्याय में पानी के प्रकार, अशुद्धता और गंदगी से पवित्रता प्राप्त करने के प्रावधानों, शौच के शिष्टाचार, मिस्वाक एवं प्राकृतिक परंपराओं, वुज़ू की विधि, वुज़ू को तोड़ने वाली चीज़ें, स्नान का तरीक़ा, तयम्मुम और मासिक धर्म के प्रावधानों का उल्लेख किया है, तथा नमाज़ के अध्याय में अज़ान व इक़ामत के प्रावधान, नमाज़ का तरीक़ा, सज्दा सह्व के नियम, नमाज़ को संछिप्त करके और दो नमाज़ों को एक साथ पढ़ने के नियम, जुमा और ईदैन की नमाज़, इस्तिस्क़ा (बारिश मांगने) की नमाज़, ग्रहण की नमाज़, स्वैच्छिक नमाज़ और मुअक्कदह सुन्नतें तथा इस्तिखारा की नमाज़ के प्रावधानों और नियमों का वर्णन किया है।

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    उस आदमी क्या हुक्म है जिसने ईदैन और इस्तिस्क़ा की नमाज़ में नमाज़ियों के साथ तशह्हुद को पाया, तो क्या वह दो रक्अत नमाज़ पढ़ेगा और उसी तरह करेगा जिस तरह इमाम ने किया है या क्या करेगा

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    यदि मनुष्य रमज़ान के महीने का रोज़ा रखने और रमज़ान में नमाज़ पढ़ने का बहुत लालायित है, किन्तु रमज़ान समाप्त होते ही नमाज़ छोड़ देता है, तो क्या उसका रोज़ा शुद्ध (मान्य) है ?

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    उस आदमी का हुक्म क्या है जो रोज़ा रखता है और नमाज़ को छोड़ देता है क्या उस का रोज़ा शुद्ध है ?

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    इस पुस्तक में, प्रमणित हदीसों की रोश में तकबीर कहने से लेकर सलाम फेरने तक नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा़ संछिप्त रूप में प्रस्तुत किया गया है।

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    रमज़ान में केवल रोज़ा रखने और नमाज़ न पढ़ने का क्या हुक्म है?

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    जो व्यक्ति नमाज़-रोज़ा नहीं करता है और इसी अवस्था में हज्ज करता है, तो उसके हज्ज का क्या हुक्म है? यदि वह अल्लाह से तौबा कर ले तो क्या वह छूटी हुई इबादतों की क़ज़ा करेगा?

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