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क़ुरआन और उसके विज्ञान

यह 90 से अधिक वैश्विक भाषाओं में क़ुरआन और उसके विज्ञान से संबंधित सबसे बड़ी पृष्ठ है. इसे कई अक्षों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया हैः • क़ुरआन करीम के अर्थों का अनुवाद • क़ुरआन की व्याख्या • कुरआन का विज्ञान • क़ुरआन और सुन्नत में वैज्ञानिक चमत्कार • क़ुरआन की तज्वीद और क़िराअतें

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    इस वीडियो में यह उल्लेख किया गया है कि क़ुरआन करीम अल्लाह सर्वशक्तिमान का वचन है, जिसे अल्लाह ने अपने अंतिम सन्देष्टा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर सर्वमानवजाति के मार्गदर्शन के लिए अवतरित किया है। अल्लाह ने संपूर्ण क़ुरआन लौहे-महफूज़ से एक ही बार में दुनियावी आकाश पर अवतरित किया, फिर थोड़ा-थोड़ा कर तेईस साल के दौरान आवश्यकता के अनुसार पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर अवतरित किया। यह पवित्र ग्रंथ किसी प्रकार के हेर-फेर और परिवर्तन से सुरक्षित है क्योंकि अल्लाह ने इसकी रक्षा की ज़िम्मेवारी स्वयं ली है। यह अल्लाह का अनन्त चमत्कार है जिसके द्वारा अल्लाह ने मानव जाति और जिन्न को इसके समान कोई भी चीज़ प्रस्तुत करने की चुनौती दी है। इस ग्रंथ में स्वयं मानव जाति और उसकी वास्तविकता, इस संसार में उसके कर्तव्यों और उद्देश्य, तथा इस जीवन के बाद महाप्रलय के समाचार और उसकी घटनाओं इत्यादि का वर्णन है।

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    इस लेख में कुरआन का संक्षिप्त परिचय देते हुए उसके अवतरण के आरंभ, उसकी कैफियत, समय, अवतरण की अवधि, उसके संकलन और उसके संरक्षण के लिए अपनाए गए प्रयोजनों और प्रावधानों तथा दुनिया भर में उसके प्रसारण व प्रकाशन और अन्य भाषाओं में उसके अर्थ का अनुवाद किए जाने का उल्लेख किया गया है। इसी तरह क़ुरआन में चर्चित मुख्य विषयों का भी उल्लेख किया गया है।

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    क़ुरआन की शिक्षाएं : मानव जीवन के विभिन्न और अनेक पहलू है, और क़ुरआन करीम समुचित मानवता का उसके जीवन के सभी विभिन्न मामलों में मार्गदर्शन करता है। चुनाँचे उसने मानव जीवन और मानव समाज को अनुशासित करने के लिए शिक्षाएं और निर्देश प्रस्तुत किए हैं। इस लेख में, कुरआन की महत्वपूर्ण शिक्षाओं का एक सार प्रस्तुत किया गया है।

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    इस युग में विभिन्न क्षेत्रों में वैज्ञानिक पुनर्जागरण देखा गया है। उन्हीं क्षेत्रों में से एक भ्रूण विज्ञान और मानव रचना के चरणों के ज्ञान से संबंधित क्षेत्र है। जिसके बारे में पहले ज़माने में जानकारी बहुत सीमित और अटकलों और मानसिक कल्पनाओं पर आधारित थी। यहाँ तक कि जब पिछली सदी में विज्ञान के क्षेत्र में विकास हुआ, तो इसके बारे में आधुनिक उपकरणों के उपयोग पर आधारित सटीक वर्णन सामने आया। जिससे यह भी स्पष्ट हो गया कि पिछले ज़माने में इसके बारे में कितना भ्रम पाया जाता था। लेकिन इसके बावजूद, हम अल्लाह की किताब क़ुरआन करीम में चौदह सौ साल पहले से ही इसके बारे में स्पष्ट बयान देखते हैं। यही नहीं बल्कि क़ुरआन करीम ने मानव रचना के सभी चरणों का उल्लेख किया है और प्रत्येक चरण का एक विशिष्ट नाम रखा है, और उसमें होनेवाले महत्वपूर्ण बदलाव का वर्णन किया है।

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    क़ुरआन पर अनुचित आक्षेपः यह पुस्तक उन आक्षेपों पर आधारित है जिन्हें कुछ हिन्दू संस्थाओं और लोगों की ओर से क़ुरआन की कुछ आयतों के बारे में उन्हें उनकी पृष्टिभूमि और संदर्भ से अलग करके और उनका मनमाना अनुवाद और व्याख्या करके बड़े पैमाने पर फैलाया जाता है। ये आक्षेप क़ुरआन मजीद की उन आयतों के बारे में हैं जिनका संबंध विशेषकर जिहाद, युद्ध, काफिर, कुफ्र, शिर्क और मूर्तिपूजा से है। लेखक ने उन आक्षेपों की वास्तविकता प्रस्तुत करके उनका उत्तर दिया है। तथा लोगों को इस्लाम से परिचित कराते हुए, उन्हें निष्पक्ष होकर इस्लाम का उसके मौलिक और वास्तविक स्रोतों से अध्ययन करने का निवेदन किया है।

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    इस पुस्तक में लेखक ने क़ुरआन की उन आयतों का तुलनात्मक अध्ययन किया है जिनमें वैज्ञानिक आँकड़ों का उल्लेख किया गया है जिनकी खोज मात्र वर्तमान युग में हुई है। अपने इस अध्ययन में वह इस नतीजे पर पहुँचे हैं कि क़ुरआन का कथन आधुनिक विज्ञान के सिद्धांतों पर पूर्णतः ठीक उतरता है, जबकि बाइबल का कथन वैज्ञानिक दृष्टि से स्वीकार करने योग्य नहीं है। तथा उन्हें यह विश्वास हो गया कि क़ुरआन वास्तव में पैगंबर पर अवतरित एक ग्रंथ है। क्योंकि यह सोचा ही नहीं जासकता कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के युग का कोई व्यक्ति उन दिनों में उपलब्ध ज्ञान-विज्ञान की स्थिति के आधार पर ऐसे वक्तव्यों का लेखक हो सकता है। तथा अंत में उन्हों ने इस बात का चर्चा किया है कि इस संपूर्ण विश्व की सृष्टि एक अप्रत्याशित घटना मात्र या प्राकृतिक वरदान का फल नहीं है, बल्कि इसका एक सृष्टा है। क्योंकि सृष्टा के बिना किसी चीज़ का होना संभव नहीं है। और वह एक सर्वशक्तिमान अल्लाह है, जिसने मनुष्य को बुद्धि से सम्मनित किया है जो उसे अन्य जीवों से अलग करती है। यही नहीं बल्कि उसके मार्गदर्शन के लिए संदेशवाहकों को भेजा और उन पर पुस्तके उतारीं। किंतु पिछले संदेशों को बाद की पीढ़ी ने विकृत कर दिया, उन्हें परिवर्तित कर दिया। इस अंधकारमय युग में बंदो पर अल्लाह की कृपा यह हुई कि उसने अपने अंतिम संदेष्टा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को स्थायी और अंतिम मार्गदर्शन के साथ भेजा और उन पर अंतिम ग्रंथ क़ुरआन अवतरित किया। इसमें सत्य को आंकने के सभी माप-दंड पूर्णतः पाये जाते हैं, जिससस स्पष्ट होता है कि क़ुरआन ईश्वरीय वाणी है। अब यह मनुष्य का काम है कि वह अपनी बुद्धि से काम लेते हुए स्वयं सत्य की खोज करे और स्वयं ही यह फैसला भी करे कि इस प्रकट सत्य के प्रति उसे क्या नीति अपनानी चाहिए।

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    इस्लाम के अनुयायी मुसलमानों का मानना है कि कुर्आन करीम अल्लाह का वचन – कलाम – है, जिसे उसने वह्य –प्रकाशना- के माध्यम से अपने अंतिम संदेष्टा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर अवतिरत किया है, जिसमें रहती दुनिया तक सर्व मानवजाति के लिए मार्ग दर्शन और निर्देश मौजूद है। चूँकि क़ुर्आन का संदेश सभी समय और स्थानों के लिए है, इसलिए इसे हर युगीन समानता के अनुसार होना चाहिये, तो क्या क़ुरआन इस कसौटी पर पूरा उतरता है ? प्रस्तुत शोध-पत्र में मुसलमानों के इस विश्वास का वस्तुगत विश्लेषण पेश किया गया है, जो क़ुर्आन के वह्य –ईश्वरवाणी- द्वारा अवतरित होने की प्रामाणिकता को वैज्ञानिक अनुसंधान के आलोक में स्थापित करती है। क़ुर्आन स्वयं एक चमत्कार है जिसने सर्व संसार वालों को चुनौती दी है कि यदि उन्हें इसके बारे संदेह है तो वे सब मिलकर उसके समान एक सूरत (कुछ छंद) ही लाकर दिखाएं ! और अभी भी यह चुनौती पुनर्जीवन के दिन तक बरकरार है। इसी प्रकार क़ुर्आन ने अनेक वैज्ञानिक वास्तविकताओं और तथ्यों की ओर संकेत किया है जिन्हें आधुनिक विज्ञान ने वर्तमान समय में शत प्रतिशत यथार्थ सिद्ध किया है और उनकी पुष्टि की है। यह सब दर्शाता है कि कुर्आन अल्लाह सर्वशक्तिमान द्वारा अवतरित एक सत्य चमत्कारीय ग्रंथ है जिसे समस्त मानव जाति के मार्गदर्शन और कल्याण के लिए अवतरित किया गया है। यह इ-बुक हिन्दी बलागर उमर केरानवी साहब का सुप्रयास है।

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    क़ुर्आन को समझने के लिए संछिप्त कोर्सः क़ुर्आन और नमाज़ को समझने की शुरूआत करने के लिए एक शार्ट कोर्स, क़ुर्आन में बाहुल्य रूप से आने वाले एक सौ मुख्य शब्दों का ज्ञान प्राप्त करके, उनका अर्थ ससझकर और उन्हें याद करने की मदमद से। यह शार्ट कोर्स टेक्सट बुक, वर्क बुक, आडियो और प्रति पाठ के पावर प्वाइंट प्रीज़ेंटेशन पर आरधारित है। इसका उद्देश्य यह है कि क़ुर्आन को समझना आसान लगने लगे, प्रोत्साहन मिले, आगे की तालीम मज़ीद आसान हो, क़ुर्आन की आयतों में मननचिंतन का रास्ता हमवार हो। यह कोर्स प्रारंभ करने वालों के लिए है, इसके बाद बेसिक कोर्स है जिसमें कुछ विस्तार है।

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    क़ुर्आन और नमाज़ को सझना शुरू कीजिएः क़ुर्आन और नमाज़ को समझने की शुरूआत करने के लिए एक शार्ट कोर्स, सूरतुल फातिहा, 6 सूरतें, नमाज़ के अज़कार और चंद दुआओं वग़ैरह की मदद से 100 मुख्य शब्दों को सझना और याद रखना जो क़ुर्आन में लगभग 40,000 बार आये हैं (कुल लगभग 77,800 में से), अर्थात् क़ुर्आन के 50 प्रतिशत शब्द!!! इसका उद्देश्य यह है कि क़ुर्आन को समझना आसान लगने लगे, प्रोत्साहन मिले, आगे की तालीम मज़ीद आसान हो, क़ुर्आन की आयतों में मननचिंतन का रास्ता हमवार हो।

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    क़ुरआन मजीद अंतिम ईशग्रंथः क़ुरआन अल्लाह की अंतिम किताब है जिसे उसने सर्व मानव-जाति के मार्गदर्शन के लिए अवतिरित किया है। यह किताब लोक-परलोक में सफलता और सौभाग्या का मार्ग दर्शाती है। प्रस्तुत पुस्तक में सतर्क औऱ स्पष्ट रूप से इस तथ्य का वर्णन किया गया है कि क़ुरआन एक ईश्वरीय ग्रंथ है, कोई मानव रचित पुस्तक नहीं है। मानव जीवन जिन विभिन्न समस्याओं से जूझ रहा है उनका एकमात्र समाधान इसी अंतम ईशग्रंथ में है, जिसके अंदर मानवता के लिए एक संपूर्ण जीवन प्रणाली, नियम और संविधान प्रस्तुत किया गया है, और इस कारण कि यही अंतिम ईशग्रंथ है जो हर प्रकार से सुरक्षित है क्योंकि इसका रक्षक स्वयं अल्लाह तआला है, जबकि इससे पुर्व के सभी ग्रंथ परिवर्तित कर दिए गए – यही मानवता के लिए लोक एवं परलोक में सफलता, सौभाग्य और मोक्ष प्राप्त करने का एकमात्र साधन है। इस ग्रंथ की प्रामाणिकता वैज्ञानिक प्रमाणों से भी सिद्ध है और वह अपने अवतरण के समय से आज तक चुनवती बना हुआ है और रहती दुनिया तक यह चुनौती निरंतर बाक़ी है कि कोई व्यक्ति इसके समान कुछ छंद भी प्रस्तुत नहीं कर सकता। तथा इस पुस्तक में यह तथ्य भी स्पष्ट किय गया है कि बहुत से लोग ईश्वर में विश्वास रखते है परंतु ईश्वर के बारे में उनकी कल्पनाओ का कोई विश्वसनीय आधार नहीं है, ईश्वर का स्पष्ट तसव्वुर और उसके गुण विशेषण की व्याख्या क़ुरआन में प्रस्तुत किया गया है, जिसकी जानकारी इस पुस्तक में दी गई है।

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    क़ुरआन अल्लाह किताब है जिसे उसने सर्व मानव-जाति के मार्गदर्शन के लिए अवतिरित किया है। यह किताब लोक-परलोक में सफलता और सौभाग्या का मार्ग गर्शाती है तथा मनुष्य को अपने अस्तित्व और इस ब्रहमांड के प्रति अनेक प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर प्रदान करती है। जैसे- मनुष्य कहाँ से आया है? उसे कहाँ जाना है? उसके जीवन का उद्देश्य क्या है? उसे प्राप्त करने का सायधन क्या है? मृत्यु के बाद क्या होगा? इत्यादि। प्रस्तुत पुस्तक में मानव जीवन उसके विभिन्न पक्षों से संबंधित सैंकड़ों प्रश्नों के क़ुरआन से उत्तर प्रस्तुत किए गए हैं, जिनके अध्ययन से पाठक को इस बात की जानकारी होती है कि क़ुरआन ने सौभाग्य जीवन का क्या मार्ग दर्शाया है।

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    मैं कभी कभी अपने किसी रिश्तेदार के लिए या अपने माता पिता के लिए या अपने मृतक दादा दादी के लिए तवाफ करता हूँ तो इस का क्या हुक्म है ? तथा उन के लिए क़ुर्आन खत्म करने का क्या हुक्म है?

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