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क़ुरआन में मननचिंतन, उसकी प्रतिष्ठा, उसका हिफ़्ज़ और तिलावत के शिष्टाचार

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    क़ुरआन की शिक्षाएं : मानव जीवन के विभिन्न और अनेक पहलू है, और क़ुरआन करीम समुचित मानवता का उसके जीवन के सभी विभिन्न मामलों में मार्गदर्शन करता है। चुनाँचे उसने मानव जीवन और मानव समाज को अनुशासित करने के लिए शिक्षाएं और निर्देश प्रस्तुत किए हैं। इस लेख में, कुरआन की महत्वपूर्ण शिक्षाओं का एक सार प्रस्तुत किया गया है।

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    क्या क़ुरआन ईश्वरीय ग्रंथ हैॽ इस पुस्तक में सतर्क यह वर्णन किया गया है कि क़ुरआन करीम सर्व मानवजाति के लिए अल्लाह का अंतिम ग्रंथ है, जिसे अल्लाह ने मानवता के मार्गलर्शन के लिए अपने अंतिम संदेष्टा मुहम्मद पर अवतरित किया है और इसकी रक्षा का वादा किया है। इसके साधन और स्रोत के बारे में लोगों के अंदर जो गलत धारणायें और विचार पाए जाते हैं उनका सतर्क खण्डने करते हुए वैज्ञानिक प्रमाणों द्वारा इस बात को प्रमाणित किया गया है कि क़ुरआन ईश्वरीय ग्रंथ है, किसी मानव का कलाम हो ही नहीं सकता। किताम के अंतिम भाग में क़ुरआन और इस्लाम के बारे में विभिन्न प्रश्नों के उत्तर प्रस्तुत किए गए हैं। यह इ-बुक हिन्दी बलागर उमर केरानवी साहब का सुप्रयास है।

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    क़ुरआन अल्लाह किताब है जिसे उसने सर्व मानव-जाति के मार्गदर्शन के लिए अवतिरित किया है। यह किताब लोक-परलोक में सफलता और सौभाग्या का मार्ग गर्शाती है तथा मनुष्य को अपने अस्तित्व और इस ब्रहमांड के प्रति अनेक प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर प्रदान करती है। जैसे- मनुष्य कहाँ से आया है? उसे कहाँ जाना है? उसके जीवन का उद्देश्य क्या है? उसे प्राप्त करने का सायधन क्या है? मृत्यु के बाद क्या होगा? इत्यादि। प्रस्तुत पुस्तक में मानव जीवन उसके विभिन्न पक्षों से संबंधित सैंकड़ों प्रश्नों के क़ुरआन से उत्तर प्रस्तुत किए गए हैं, जिनके अध्ययन से पाठक को इस बात की जानकारी होती है कि क़ुरआन ने सौभाग्य जीवन का क्या मार्ग दर्शाया है।

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    पवित्र क़ुर्आन मानवता के नाम अल्लाह का सर्व कालिक और अन्तिम संदेश है, जो मानवता की लौकिक और पारलौकिक हितों के मार्गदर्शन पर आधारित है, जो सत्य और असत्य, मार्गदर्शन और पथभ्रष्टता, सौभाग्य और दुर्भाग्य के बीच अन्तर स्पष्ट करता है। वह महीना जिस में मानवता को यह सौभाग्य प्राप्त हुआ, वह रमज़ान का ही शुभ महीना है। इसलिये हमारे अति उचित है कि हम विशेष रूप इस मुबारक महीने में इस महान ग्रंथ का पाठ करने, उसे पढ़ने-पढ़ाने, सीखने-सिखाने, उसमें मननचिंतन करने और उसके अनुसार कार्य करने पर भरपूर ध्यान दें। इस पर हमें क्या लाभ मिलेगा ? पढ़िये इस लेख में।

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