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खाने और पीनेवाली चीज़ों के अहकाम

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    आदरणीय शैख अब्दुल अज़ीज़ बिन अब्दुल्लाह बिन बाज़ रहिमहुल्लाह से प्रश्न किया गया किः अगर मुसलमान किसी ईसाई या उसके अलावा किसी अन्य काफिर (अविश्वासी) के साथ खाता या पीता है, तो क्या इसे हराम समझा जायेगा? और यदि वह हराम है, तो हम अल्लाह तआला के फरमान : ﴿وَطَعَامُ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ حِلٌّ لَكُمْ وَطَعَامُكُمْ حِلٌّ لَهُمْ ﴾ [المائدة : 5] ’’जिन लोगों को किताब दी गई है (यानी यहूदी और ईसाइ) उनका खाना तुम्हारे लिए हलाल है, और तुम्हारा खाना उनके लिए हलाल है।’’ (सूरतुल मायदाः 5) के बारे में क्या कहेंगे ?

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    इस देश में बहुत से मुस्लिम छात्रों को पढ़ाई और रहन सहन के खर्च को कवर करने के लिए काम करना पड़ता है, क्योंकि उनमें से बहुत से पर्याप्त रूप से अपने परिवार से खर्च नहीं पाते हैं, जिसके कारण उनके लिए काम करना एक जरूरत बन जाता है जिसके बिना जीवन यापन नहीं कर सकते। अक्सर उन्हें ऐसे रेस्तरां के अलावा कहीं काम नहीं मिलता जिसमें शराब बेची जाती है, या पोर्क और अन्य हराम चीज़ों वाले खाने पेश किए जाते हैं। प्रश्न यह है कि इन स्थानों में काम करने का क्या हुक्म है? तथा मुसलमान के लिए शराब और सुअर बेचने, या शराब बनाने और उसे गै़र-मुस्लिमों को बचने का क्या हुक्म है? ध्यान रहे कि इस देश में कुछ मुसलमानों ने इसे अपना पेशा (व्यवसाय) बना रखा है।

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