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पाकिस्तान में सूफी लोग (सूफिया) धर्म के नाम पर बुराई की जड़ और आधार हैं, जब मैं ने एक आदमी को जिस के बारे में यह कहा जाता है कि वह ज्ञान वाला (आलिम) आदमी है, यह कहते हुए सुन कर दंग रह गया कि : "आप अल्लाह के पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से वास्तकिव रूप में मुलाक़ात कर सकते है।" उस के कहने का मक़सद यह था कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अपनी असली शक्ल में . . . उन के वली के पास आते हैं . . . वे लोग केवल नबी सल्लल्लाहु अलैहि के न मरने का अक़ीदा हनहीं रखते है, बल्कि यह भी कहते हैं कि आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम उन के औलिया की इन दिनों ज़िन्दा हालत में ज़ियारत भी करते हैं। हम इन का जवाब कैसे दें ? और शरीअत में इन का हुक्म क्या है ?

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