विवरण

अल्लाह का शुक्र है मैं हाल ही में मुसलमान हुई हूँ, मैं एक हिंदू समाज में पली बढ़ी हूँ और निरंतर उसी में रह रही हूँ। यह माहौल मेरे लिए अपने नये धर्म के पालन के रास्ते में बहुत सी बाधाएं पैदा करता है, और यहाँ पर निश्चित रूप से मेरा प्रश्न नमाज़ के बारे में है, मेरे माता पिता बहुत कट्टरपंथी हैं और वे दोनों मुसलमानों के बारे में कुछ भी सुनना नहीं चाहते हैं, बजाय इसके कि उन्हें यह पता चले कि उनकी बेटी ने इस्लाम स्वीकार कर लिया है! इसलिए मैं उनसे इस मामले को गुप्त रखी हूँ, और समस्या यहाँ पर निहित है कि मैं घर में नमाज़ नहीं पढ़ सकती हूँ, घर बहुत छोटा है और उसमें कोई भी कुछ करता है तो उसमें उपस्थित सभी लोगों को उसका पता चल जाता है, एक बार मेरी माँ ने मुझे नमाज़ पढ़ते हुए देख लिया तो उसी समय से वह मुझ पर नियंत्रण कणा किए हुए है और मुझ पर पाबंदियाँ लगाती रहती है, यह तो घर का मामला है, रही बात आफिस की तो उसमें स्थिति और भी कठोर है, क्योंकि वहाँ किसी भी तरह से नमाज़ पढ़ना संभव नहीं है। इन सभी प्रतिबंधों को देखते हुए मैं वुज़ू करती हूँ और अपने आपको नमाज़ के लिए तैयार रखती हूँ और उसका समय होते ही अपनी मेज़ पर बैठी हुई नमाज़ पढ़ती हूँ। चुनाँचे नमाज़ की सभी कैफियतों को अपने दिल में अंजाम देती हूँ, रही बात घर की तो मैं सामान्य रूप से नमाज़ के लिए उचित समय की ताक में रहती हूँ, यदि मुझे अवसर मिल जाता है तो पढ़ लेती हूं, अन्यथा मैं लेटे हुए या बैठे हुए या इसके अलावा अन्य तरीक़े पर नमाज़ पढ़ती हूँ। स्थिति बहुत कठिन है, कभी कभी मैं नियमित रूप से नमाज़ पढ़ना शुरू करती हूँ कि अपनी माँ के आने की आवाज़ सुनती हूँ तो उसे खत्म करके दूसी चीज़ में व्यस्त होने पर मजबूर हो जाती हूँ, तो आपकी क्या सलाह है ॽ तथा मैं नमाज़ के अंदर सिर और दोनों हथेलियों को ढकने की अनिवार्यता को जानना चाहती हूँ, क्या यह अनिवार्य है ॽ तथा मेरी व्यक्तिगत स्थिति के बारे में क्या हुक्म है जबकि मैं ने आपके सामने अपनी स्थिति को स्पष्ट कर दिया है ॽ यदि मैं सिर और दोनों हथेलियों को ढके बिना नमाज़ पढ़ूँ तो क्या मेरी नमाज़ क़बूल होगी ॽ तथा यहाँ पर मैं आपको अपने बारे में इस तथ्य को बताना चाहती हूँ कि मैं बहुत सी कठिनाइयों और परेशानियों का सामना करती हूँ इसलिए नमाज़ के अंदर मैं बहुत आराम और सांस लेने का साधन पाती हूँ। ज्यों ही मैं नमाज़ पढ़ती हूँ और अल्लाह से दुआ करती हूँ तो मेरा सीना खुल जाता है और मेरे अंदर नये सिरे से आशा लौट आती है, किंतु मैं अरबी भाषा नहीं जानती हूँ, तो क्या मुझे अंग्रेज़ी भाषा में क़ुर्आन पढ़ने पर पुन्य मिलेगा ॽ इसी तरह मेरी अधिकांश नमाज़ भी अग्रेज़ी ही में होती है तो क्या वह क़बूल होगी ॽ मैं अभी अरबी भाषा सीखने की प्रक्रिया में हूँ और निकट भविष्य में इन - शा अल्लाह मेरी पूरी नमाज़ अरबी भाषा में होगी। मैं आप से नसीहत, सुझाव और सलाह के लिए अनुरोध करती हूँ, क्योंकि मेरे पास एक या दो के अलावा मुसलमान दोस्त नहीं हैं और वे भी धार्मिकता और धर्मनिष्ठा वाले नहीं हैं, तथा मैं जिस जगह रहती हूँ उसके कारीब कोई ऐसी जगह नहीं है जहाँ जाकर मैं अपने धर्म की शिक्षा प्राप्त कर सकूँ, मेरे लिए इंटरनेट ही एकमात्र साधन है, तथा मुझे यहाँ पर आपको इस सेवा पर धन्यवाद करना नहीं भूलना चाहिए जो आप प्रस्तुत कर रहे हैं, मैं ने इससे बहुत लाभ उठाया है।

फ़ीडबैक