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    मैंने अभी इस्लाम स्वीकार किया है....तो मैं क्या शिक्षा प्राप्त करूँ ?

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    यह पुस्तक सत्य धर्म को पहचानने और उसे स्वीकारने का आमंत्रण देती है क्योंकि वही एक मात्र विकल्प है जो मानवता के लिए लोक एवं परलोक में सफलता, सौभाग्य और नरक से मोक्ष प्राप्त करने का एकमात्र साधन है। प्रस्तुत पुस्तक इस बात पर प्रकाश डालती है कि मानव जाति की रचना का उद्देश्य क्या है - वह एकमात्र अल्लाह सर्वशक्तिमान की उपासना और आराधना है। इसिलए कि वही वास्तव में उपासना के योग्य है क्योंकि वही सबका सृष्टा, रचयिता, पालनकर्ता, व्यवस्थापक है तथा उसके अच्छे अच्छे नाम और सर्वोच्च गुण हैं। मानव जाति को अल्लाह के नियम, आदेशों और उसकी प्रसन्नता की चीज़ों को जानने के लिए संदेष्टा और ईश्दूतों की आवश्यकता होती है। चुनाँचे अल्लाह ने ईश्दूतों को भेजा और उनके साथ किताबें उतारी ताकि वे लोगों को अल्लाह के आदेश और निषेध से अवगत कराएं। उन महान पुरूषों ने अल्लाह के एकेश्वरवाद का आमंत्रण दिया, जिसका उल्लेख पिछले आकाशीय ग्रंथों और हिंदूमत के वेदों में भी मिलता है। सबसे अंतिम ईश्दूत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हैं जिन पर अल्लाह ने अपना अंतिम और अनन्त दिव्य क़ुरआन उतारा जो सर्व मानव जाति के लिए मार्गदर्शक है। जिसका पालन करके ही मनुष्य लोक एवं परलोक में सफलता, सौभाग्य और नरक से मुक्ति प्राप्त कर सकता है। वह सत्य धर्म इस्लाम है जिसे हमारे सृष्टा ने असंख्य गुणों और विशेषताओं से सुसज्जित किया है। अतः आईये इसके पन्नों को पढ़ें और मननचिंतन करें कि क्या यह जीवन असीमित है या उसका कोई अंत है ॽ और मृत्यु के पश्चात क्या होगा ॽ

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    यह पुस्तिका, हज्ज व उम्रा और मस्जिदे नबवी की ज़ियारत के लिए संक्षिप्त गाइड है, जिसमें सार रूप से हज्ज व उम्रा और मस्जिदे नबवी की ज़ियारत से संबंधित महत्वपूर्ण और आवश्यक जानकारी प्रस्तुत की गई है। तथा हज्ज व उम्रा और ज़ियारत के दौरान होने वाली त्रुटियों पर चेतावनी दी गई है। साथ ही साथ इसमें हाजियों के लिए अहम निर्देश और नसीहतें हैं।

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    प्रस्तुत पुस्तक में ऐसे लोगों की कहानी उन्हीं की ज़ुबानी उल्लेख की गई है जिन्हों ने इस्लाम का गहन अध्ययन किया, उसे समझा और सोच-विचार कर उसे दिल की गहराईयों से स्वीकार किया जबकि वे वैज्ञानिक, चिकित्सक और बुद्धिमान लोग थे। इस पुस्तक का उद्देश्य केवल संसार वालों को यह बताना है कि आपके इन मित्रों के इस्लाम स्वीकारने का कारण क्या है तथा वे परलोक में क्या चाहते हैं तथा साथ ही साथ सारे लोगों को निमंत्रण देना है कि हरेक इस बात पर विचार करे कि हमारा तथा संसार की सभी चीज़ों का सृष्टा, रचयिता, पालनहार और स्वामी कौन है क्या वही सर्वशक्तिमान एकमात्र वास्तविक पूज्य नहीं है क्या उसके अतिरिक्त कोई और पूज्य हो सकता है

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    यह पुस्तक तहारत और नमाज़ के प्रावधानों और नियमों से संबंधित महत्वपूर्ण संछिप्त लेख है जिसमें लेखक ने पवित्रता और नमाज़ के नियमों को संछेप में वर्णन किया है, पवित्रता के अध्याय में पानी के प्रकार, अशुद्धता और गंदगी से पवित्रता प्राप्त करने के प्रावधानों, शौच के शिष्टाचार, मिस्वाक एवं प्राकृतिक परंपराओं, वुज़ू की विधि, वुज़ू को तोड़ने वाली चीज़ें, स्नान का तरीक़ा, तयम्मुम और मासिक धर्म के प्रावधानों का उल्लेख किया है, तथा नमाज़ के अध्याय में अज़ान व इक़ामत के प्रावधान, नमाज़ का तरीक़ा, सज्दा सह्व के नियम, नमाज़ को संछिप्त करके और दो नमाज़ों को एक साथ पढ़ने के नियम, जुमा और ईदैन की नमाज़, इस्तिस्क़ा (बारिश मांगने) की नमाज़, ग्रहण की नमाज़, स्वैच्छिक नमाज़ और मुअक्कदह सुन्नतें तथा इस्तिखारा की नमाज़ के प्रावधानों और नियमों का वर्णन किया है।

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