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    बारिश होने के समय मुसलमान का क्या व्यहार होना चाहिए : वर्षा का उतरना मात्र अल्लाह सर्वशक्तिमान की कृपा और दया है। बारिश ही आजीविका का स्रोत है जिसे अल्लाह सर्वशक्तिमान एक नियमित मात्रा में आकाश से धरती पर अवतरित करता है। इसलिए मनुष्य को चाहिए कि उसका अकेले श्रेय अल्लाह सर्वशक्तिमान को दे, उसे किसी तारे या नक्षत्र का प्रभाव न ठहराए। प्रस्तुत व्याख्यान में इस बात का उल्लेख किया गया है कि वर्षा होते समय एक विश्वासी मुसलमाम की स्थिति होनी चाहिए।

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    यज़ीद कौन? - 3 हिन्दी

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    मुहर्रमुल-हराम का महीना हुर्मत व अदब और प्रतिष्ठा वाला महीना है। इसी महीने की दसवीं तारीख को (आशूरा के दिन) अल्लाह तआला ने पैगंबर मूसा अलैहिस्सलाम को फिरऔन से मुक्ति प्रदान की। जिस में रोज़ा रखना मुस्तहब है, जो कि पिछले एक वर्ष के गुनाहों का कफ्फारा हो जाता है। किन्तु अधिकांश मुसलमान इस से अनभिग हैं और इस महीने की हुर्मत को भंग करते हुए इसे शोक प्रकट करने, नौहा व मातम करने और सीना पीटने...आदि का महीना बना लिया है। इस महीने का एक पहलू यह भी है कि इसी से इस्लामी वर्ष का आरंभ होता है। परंतु यह भी एक तथ्य है कि इसके प्रवेष करते ही हर साल यज़ीद, कर्बला की घटना और उसमें घटित होना वाली हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु की शहादत के बारे में चर्चा शुरू हो जाती है। जिसमें सहाबा किराम रज़ियल्लाहु अन्हुम तक को निशाना बनाने, बुरा-भला कहने, धिक्कार करने में संकोच नहीं किया जाता है। राफिज़ा-शिया की तो बात ही नहीं करनी ; क्योंकि उनका तो यही धर्म है, मगर खेद की बात यह है कि बहुत से अहले सुन्नत वल जमाअत से निस्बत रखनेवाले लोग भी राफिज़ा-शिया का राग अलापते हैं और बिना, सत्यापन, जाँच-पड़ताल और छान-बीन के उन्हीं की डगर पर चलते नज़र आते हैं। प्रस्तुत व्याख्यान में यज़ीद के बार में अहले सुन्न वल जमाअत के पूर्वजों और वरिष्ठ विद्वानों के कथनों और उनके विचारों का सविस्तार उल्लेख किया गया है।

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    यज़ीद कौन? - 2 हिन्दी

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    मुहर्रमुल-हराम का महीना हुर्मत व अदब और प्रतिष्ठा वाला महीना है। इसी महीने की दसवीं तारीख को (आशूरा के दिन) अल्लाह तआला ने पैगंबर मूसा अलैहिस्सलाम को फिरऔन से मुक्ति प्रदान की। जिस में रोज़ा रखना मुस्तहब है, जो कि पिछले एक वर्ष के गुनाहों का कफ्फारा हो जाता है। किन्तु अधिकांश मुसलमान इस से अनभिग हैं और इस महीने की हुर्मत को भंग करते हुए इसे शोक प्रकट करने, नौहा व मातम करने और सीना पीटने...आदि का महीना बना लिया है। इस महीने का एक पहलू यह भी है कि इसी से इस्लामी वर्ष का आरंभ होता है। परंतु यह भी एक तथ्य है कि इसके प्रवेष करते ही हर साल यज़ीद, कर्बला की घटना और उसमें घटित होना वाली हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु की शहादत के बारे में चर्चा शुरू हो जाती है। जिसमें सहाबा किराम रज़ियल्लाहु अन्हुम तक को निशाना बनाने, बुरा-भला कहने, धिक्कार करने में संकोच नहीं किया जाता है। राफिज़ा-शिया की तो बात ही नहीं करनी ; क्योंकि उनका तो यही धर्म है, मगर खेद की बात यह है कि बहुत से अहले सुन्नत वल जमाअत से निस्बत रखनेवाले लोग भी राफिज़ा-शिया का राग अलापते हैं और बिना, सत्यापन, जाँच-पड़ताल और छान-बीन के उन्हीं की डगर पर चलते नज़र आते हैं। प्रस्तुत व्याख्यान में यज़ीद के बार में अहले सुन्न वल जमाअत के पूर्वजों और वरिष्ठ विद्वानों के कथनों और उनके विचारों का सविस्तार उल्लेख किया गया है।

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    यज़ीद कौन? - 1 हिन्दी

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    मुहर्रमुल-हराम का महीना हुर्मत व अदब और प्रतिष्ठा वाला महीना है। इसी महीने की दसवीं तारीख को (आशूरा के दिन) अल्लाह तआला ने पैगंबर मूसा अलैहिस्सलाम को फिरऔन से मुक्ति प्रदान की। जिस में रोज़ा रखना मुस्तहब है, जो कि पिछले एक वर्ष के गुनाहों का कफ्फारा हो जाता है। किन्तु अधिकांश मुसलमान इस से अनभिग हैं और इस महीने की हुर्मत को भंग करते हुए इसे शोक प्रकट करने, नौहा व मातम करने और सीना पीटने...आदि का महीना बना लिया है। इस महीने का एक पहलू यह भी है कि इसी से इस्लामी वर्ष का आरंभ होता है। परंतु यह भी एक तथ्य है कि इसके प्रवेष करते ही हर साल यज़ीद, कर्बला की घटना और उसमें घटित होना वाली हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु की शहादत के बारे में चर्चा शुरू हो जाती है। जिसमें सहाबा किराम रज़ियल्लाहु अन्हुम तक को निशाना बनाने, बुरा-भला कहने, धिक्कार करने में संकोच नहीं किया जाता है। राफिज़ा-शिया की तो बात ही नहीं करनी ; क्योंकि उनका तो यही धर्म है, मगर खेद की बात यह है कि बहुत से अहले सुन्नत वल जमाअत से निस्बत रखनेवाले लोग भी राफिज़ा-शिया का राग अलापते हैं और बिना, सत्यापन, जाँच-पड़ताल और छान-बीन के उन्हीं की डगर पर चलते नज़र आते हैं। प्रस्तुत व्याख्यान में यज़ीद के बार में अहले सुन्न वल जमाअत के पूर्वजों और वरिष्ठ विद्वानों के कथनों और उनके विचारों का सविस्तार उल्लेख किया गया है।

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    का इस्लामी तरीक़ा : इसमें कोई संदेह नहीं कि मतभेद का पैदा होना स्वभाविक है, और जीवन में ऐसा होता रहता है। वर्तमान समय में तो, धर्म से अनभिज्ञता या उससे दूरी के कारण, इसका ग्राफ़ बढ़ गया है। प्रस्तुत व्याख्यान में मतभेद को हल करने और विवाद को सुलझाने के इस्लामिक तरीक़ा पर प्रकाश डाला गया है, और वह तरीक़ा यह है कि हर छोटे-बड़े मतभेद में क़ुरआन और सुन्नत की ओर पलटा जाए, और उसे सुलझाने में पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के निर्देश़, मार्गदर्शन और आपके सहाबा रज़ियल्लाहु अन्हुम के तरीक़े का अनुसरण किया जाए।

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    आमंत्रणः अल्लाह सर्वशक्तिमान ने अपने ईश्दूत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को सर्व मानवजाति के लिए अपना अंतिम संदेष्टा बनाकर भेजा। यह एक ऐसे समय पर घटित हुआ जब अरब के लोग लड़कियों को जीवित गाड़ दिया करते थे, आपस में मामूली बात पर कट-मरते थे, मूर्तियों की पूजा करते थे, महिलाओं पर अत्याचार और उनका अपमान करते थे। ऐसी गंभीर परिस्थिति में, अल्लाह ने आपको मानवजाति के लिए दया व करुणा बनाकर अवतिरत किया। आप ने लोगों कों सत्य-धर्म, सफलता और सौभाग्य का मार्ग दर्शाया, उन्हें मूर्तियों की पूजा से निकालकर एकमात्र सर्वशक्तिमान अल्लाह की उपासना पर लगाया, और समाज के सभी सदस्यों के लिए उनके अधिकारों को सुनिश्चित किया। अतः मानवता के लिए सौभाग्य और शांति केवल इस्लाम की शिक्षाओं में है। इस्लाम के लिए आमंत्रित करना यथाशक्ति हर मुसलमान की ज़िम्मेदारी है। हर मुसलमान को अपने इस्लाम-ज्ञान के अनुसार अल्लाह के धर्म की ओर आमंत्रण देना चाहिए, तथा उसे इसके लिए शिष्टाचार से भी सुसज्जित होना चाहिए।

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    अल्लाह सर्वशक्तिमान ने हमें सूचना दी है कि दुनिया का यह जीवन नश्वर है, स्थायी नहीं है और इसके बाद परलोक का जीवन ही स्थायी और सदा रहनेवाला घर है। इसी तरह यह जीवन कार्य और परीक्षण का घर है, जिसमें मनुष्य कार्य करता है, खेती करता है ताकि इसके बाद के जीवन में उसका प्रतिफल प्राप्त करे। इसीलिए अल्लाह ने मनुष्य को चेतावनी दी है कि उसे दुनिया और उसके श्रंगार से धोखा नहीं खाना चाहिए। क्योंकि यह दुनिया परलोक के सामने कुछ भी महत्व नहीं रखती है। तथा अल्लाह सर्वशक्तिमान दुनिया उसे भी देता है जिससे प्यार करता है और जिससे प्यार नहीं करता। अतः मनुष्य को चाहिए कि वह आखिरत की अनदेखी कर दुनिया में लिप्त न हो जाए। बल्कि उसका मूल उद्देश्य परलोक का जीवन और उसकी अनश्वर समृद्धि होनी चाहिए। प्रस्सतुत व्याख्यान में इसी का वर्णन किया गया है।

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    प्रस्तुत लेख उस महान हस्ती के संक्षिप्त वर्णन पर आधारित है जो निःसंदेह इस धरती पर क़दम रखनेवालों में सबसे महान हैं। जिन्हों ने इस्लाम धर्म की ओर लोगों को आमंत्रित किया, एक राज्य की स्थापना की, एक राष्ट्र का निर्माण किया और नैतिकता की नींव डाली। इसके अलावा बहुत सारी राजनीतिक और सामाजिक स्थितियों को ठीक किया और इसके माध्यम से एक स्वस्थ, सशक्त और प्रभावी समाज की स्थापना की। वह अल्लाह के अंतिम संदेष्टा मुहम्मद हैं, उनपर अल्लाह की दया व शांति अवतरित हो.

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    पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सादगीः क्या आप जानते हैं कि मानव इतिहास के सबसे महान पुरूष पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का जीवनयापन किस तरह था? आपकी महान स्थिति और सर्वोच्च पद के बावजूद सादगी का यह हाल था कि कई दिनों तक चूल्हा ही नहीं जलता था।

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    जीवन का सीधा और सच्चा मार्ग पाने के लिए मनुष्य को सदैव ईश्वरीय मार्ग-प्रदर्शन की आवश्यकता होती है। इससे हटकर वह सीधा मार्ग नहीं पा सकता। इसी उद्देश्य के लिए अल्लाह सर्वशक्तिमान ने किताबें उतारीं और अपने सन्देष्टा भेजे, जिन्हों ने लोगों के समक्ष अल्लाह के संदेश को प्रस्तुत किया, उसके अभिप्राय को स्पष्ट किया और उसके अनुसार चलकर दिखाया ; ताकि लोगों को अल्लाह के आदेशों के अनुसार जीवन व्यतीत करने का तरीक़ा पता चल जाए। इसकी अंतिम कड़ी हमारे सन्देष्टा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हैं, जिन पर नुबुव्वत व रिसालत का सिलसिला संपन्न हो जाता है और आपकी रिसालत को स्वीकार करना और उसका अनुपालन करना परलोक तक आनेवाली समस्त मानव जातियों के लिए कर्तव्य और दायित्व करार दिया जाता है, क्योंकि इसके बाद अल्लाह की ओर से कोई अन्य संदेष्टा, कोई और मार्ग-दर्शक अवतरित नहीं होगा। प्रस्तुत लेख में अंतिम सन्देष्टा के जीवन आदर्श का उल्लेख किया गया है।

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    अपने बच्चे को पैगंबर की कहानी सुनायें: इस पुस्तिका में हमारे प्रिय पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के बचपन से संबंधित कहानियों का एक समूह प्रस्तुत किया गया है, जिन्हें बच्चों को सुनाना उचित है।. इस पुस्तिका में हमारे प्रिय पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की किशोरावस्था से संबंधित कहानियों का एक समूह प्रस्तुत किया गया है, जो बच्चों को सुनाना उचित है।.

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    मैं मुसलमानों के लिए एक वैकल्पिक रेडियो स्टेशन बनाना चाहता हूँ, तथा मैं इस स्टेशन के माध्यम से मुसलमानों और ग़ैर मुसलमानों दोनों को आमंत्रित करना चाहता हूँ, अब तक मेरे विचार यह हैं कि : मैं संगीत वाद्य यंत्र से खाली गीत प्रस्तुत करूँ . . , तो क्या -कृपया- आप मुझे सलाह दे सकते हैं कि मेरे लिए क्या करना जाइज़ है और क्या जाइज़ नहीं है ॽ

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    इसमें कोई संदेह नहीं कि यह दुनिया नश्वर है, और परलोक का जीवन ही सदैव बाक़ी रहने वाला और मनुष्य का स्थायी घर है। यह सांसारिक जीवन मात्र एक परीक्षा और परलोक की तैयारी और उसकी खेती है। तथा लोक और परलोक की सफलता और सौभाग्य प्राप्त करने का एकमात्र रास्ता वह सीधा मार्ग है जिसे हमारे संदेष्टा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम लेकर आए हैं। अतः जो व्यक्ति इस पर चलेगा वह सफल होगा और जो उससे उपेक्षा करेगा वह घाटे में रहेगा। इस पुस्तिका में उसी रास्ते का निर्देशन किया गया है।

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    इस्लाम के पैगंबर - एक आदर्श चरित्र इस पुस्तिका में इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के (अपने सर्वशक्तिमान पालनहार और लोगों के साथ) व्यवहार के कुछ नमूने प्रस्तुत किए गए हैं, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि आपका जीवन मानव चरित्र का आदर्श नमूना था। तथा इन घटनाओं से व्यावहारिक रूप से हमें यह सबक़ मिलता है कि मनुष्य अल्लाह का बंदा है, और उसे हर हाल में अल्लाह का बंदा बनकर रहना चाहिए। उसके दिल में अल्लाह का अैर उसकी आखिरत का तूफान बरपा रहे, दुनिया की सारी चीज़ उसे अल्लाह की याद दिलाए, दुनिया में कोई भी मामला करते समय कभी यह न भूले कि सभी चीज़ों का अंजाम अल्लाह के हाथ में है, नरक का डर उसे इनसानों के प्रति विनम्र बना दे और स्वर्ग का शौक़ उसकी निगाह में दुनिया को अर्थहीन कर दे - यह है मानव चरित्र का वह नमूना जो अल्लाह के पैगंबर ने अपने कर्म से हमें बताया है।

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    इस्लामी अक़ीदा क़ुरआन और हदीस रोशनी मेः प्रस्तुत पुस्तक इस्लामी अक़ीदा से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों पर आधारित है, जिनका क़ुरआन और हदीस की रोशनी में उत्तर दिया गया है। चुनांचे इसमें इस्लाम व ईमान का अर्थ, तौहीद की क़िस्में और उसके लाभ, ला इलाहा इल्लल्लाह का अर्थ और उसकी शर्तें, अमल के क़बूल होने की शर्तो, शिर्क अक्बर की क़िस्में और और उसके नुक़सानात, वसीला और शफाअत मांगने के प्रावधान का उल्लेख किया गया है।

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    आसान क़ुर्आनिक कोशः क़ुर्आन करीम मानवता के नाम अल्लाह का अंतिम संदेश है जिसमें परलोक तक के लिए आने वाली मानवजाति के लिए सांसिरक जीवह में कल्याण, सफलता और सौभाग्या तथा परलोक में मोक्ष का मार्गदर्शन है। इसलिए सर्व मनुष्य के लिए इसके संदेश को समझना अति आवश्यक है जिसे उसके सृष्टा व पालनकर्ता ने भेजा है। प्रस्तुत पुस्तक हिंदी भाषियों को उनके पालनहार के अंतिम संदेश और मार्गदर्शन से अवगत कराने का एक सराहनीय प्रयास है। यह पुस्तक या कोश तीह भागों में विभाजित है, प्रथम भाग मे प्रति दिन पढ़ी जाने वाली छोटी सूरतों, नमाज़ की दुआओं, सुबह शाम ... इत्यादि की दुआओं का अनुवाद प्रस्तुत किया गया है। जबकि दूसरे भाग में बेसिक अरबी व्याकरण का उल्लेख किया गया है। तीसरे और अंतिम भाग में पूरे क़ुर्आन के कठिन शब्दों का अर्थ वर्णन किया गया है।

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    ईश्दूत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह के अंतिम संदेष्टा हैं जिन्हें अल्लाह सर्व मानव जाति की ओर अपना संदेश्वाहक बनाकर भेजा है। अतः आप केवल मुसलमानों के लिए आदर्श नहीं हैं बल्कि परलोक के दिन तक आने वाली सर्वमानव जाति के लिए मार्गदर्शक और सर्वश्रेष्ठ आदर्श हैं। इस पुस्तिका में पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के जीवन और धर्म संदेश के कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओ पर संछिप्त के साथ प्रकाश डाला गया है।

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    इस पुस्तिका में इस्लामी अक़ीदा से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण मसाइल को प्रश्न-उत्तर के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ये मसअले शैख मुहम्मद जीमल ज़ैनू की पुस्तक (अल-अक़ीदा अल-इस्लामिय्या मिनल किताबि वस्सुन्नतिस्सहीहा) से संकलित किए गए हैं। इसमें शिर्क, तौहीद, जादू, वसीला, दुआ, तसव्वुफ, क़ब्रों की जि़यारत और उस पर सज्दा करना और उसे छूना इत्यादि जैसे मसाइल पर चर्चा किया गया है।

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    इस लेख में इस धरती पर जन्मित सबसे महान पुरुष मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का अति संछिप्त परिचय तथा आप के कुछ महान गुणों और चमत्कारों का उल्लेख किया गया है। तथा इस बात को स्पष्ट किया गया है कि आप सर्व मानव जाति के लिए संदेष्टा बनाकर भेजे गए हैं। इसी प्रकार अन्य धार्मिक ग्रंथों में वर्णित आपके के कुछ गुण विशेषण का भी उल्लेख किया गया है।

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    अल्लाह के पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लमः जब पूरी दुनिया विचारधारा के अंधकार तथा भ्रष्ट-उपासना, अत्याचार, अन्याय, नैतिक और सांस्कृतिक गिरावट, पतन, पिछड़ेपन, मूर्खता और अज्ञानता के अँधेरे में भटक रही थी कि अरब द्वीप के पवित्र नगर मक्का मुकर्रमा में अल्लाह के संदेष्टा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के स्वरूप में एक उज्जवल प्रकाश फूटा जिसकी किरणों से सर्वसंसार प्रकाशमान हो गया औऱ उसे इस्लाम का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। प्रस्तुत पुस्तक में पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पवित्र जीवनी, आपके सदव्यवहार, स्वभाव, गुण-विशेषण, शिष्टाचार पर संक्षेप में प्रकाश डाला गया है। तथा आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के ईश्दूतत्व की पुष्टि करने वाले मूलग्रंथों - क़ुर्आन व हदीस - और पिछली आसमानी ग्रंथों से कुछ प्रमाण और अक़्ली तर्क भी वर्णन किये गये हैं। साथ-साथ ही आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के विषय में गैर-मुस्लिमों की कुछ गवाहियों को भी प्रस्तुत किया गया है।

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