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    आसान क़ुर्आनिक कोशः क़ुर्आन करीम मानवता के नाम अल्लाह का अंतिम संदेश है जिसमें परलोक तक के लिए आने वाली मानवजाति के लिए सांसिरक जीवह में कल्याण, सफलता और सौभाग्या तथा परलोक में मोक्ष का मार्गदर्शन है। इसलिए सर्व मनुष्य के लिए इसके संदेश को समझना अति आवश्यक है जिसे उसके सृष्टा व पालनकर्ता ने भेजा है। प्रस्तुत पुस्तक हिंदी भाषियों को उनके पालनहार के अंतिम संदेश और मार्गदर्शन से अवगत कराने का एक सराहनीय प्रयास है। यह पुस्तक या कोश तीह भागों में विभाजित है, प्रथम भाग मे प्रति दिन पढ़ी जाने वाली छोटी सूरतों, नमाज़ की दुआओं, सुबह शाम ... इत्यादि की दुआओं का अनुवाद प्रस्तुत किया गया है। जबकि दूसरे भाग में बेसिक अरबी व्याकरण का उल्लेख किया गया है। तीसरे और अंतिम भाग में पूरे क़ुर्आन के कठिन शब्दों का अर्थ वर्णन किया गया है।

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    ईश्दूत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह के अंतिम संदेष्टा हैं जिन्हें अल्लाह सर्व मानव जाति की ओर अपना संदेश्वाहक बनाकर भेजा है। अतः आप केवल मुसलमानों के लिए आदर्श नहीं हैं बल्कि परलोक के दिन तक आने वाली सर्वमानव जाति के लिए मार्गदर्शक और सर्वश्रेष्ठ आदर्श हैं। इस पुस्तिका में पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के जीवन और धर्म संदेश के कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओ पर संछिप्त के साथ प्रकाश डाला गया है।

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    इस लेख में इस धरती पर जन्मित सबसे महान पुरुष मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का अति संछिप्त परिचय तथा आप के कुछ महान गुणों और चमत्कारों का उल्लेख किया गया है। तथा इस बात को स्पष्ट किया गया है कि आप सर्व मानव जाति के लिए संदेष्टा बनाकर भेजे गए हैं। इसी प्रकार अन्य धार्मिक ग्रंथों में वर्णित आपके के कुछ गुण विशेषण का भी उल्लेख किया गया है।

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    वे कौन से लोग हैं जो अज्ञानता के कारण क्षम्य (मा’ज़ूर) समझे जायेंगे ? और क्या आदमी धर्मशास्त्र के मामलों में अपनी अज्ञानता के कारण क्षम्य समझा जायेगा ? या अक़ीदा और तौहीद (एकेश्वरवाद) के मामलों में क्षम्य समझा जायेगा ? और इस मामले के प्रति विद्वानों का क्या कर्तव्य है ?

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    कई सारे देश जैसे किः तु्र्की, मेक्सिको, ताइवान, जापान और अन्य देश ... भूकंप से ग्रस्त हुए हैं, तो क्या ये किसी बात के संकेतक हैं ?

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    इत्तिबा-ए-सुन्नत और तक़लीद से संबंधित यह एक बात-चीत है जो एक शांतिपूर्ण वातावरण में अब्दुल्लाह और अहमद नामी दो व्यक्तियों के बीच हुई है। जिस में यह स्पष्ट किया गया है कि रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत का इत्तिबा करना ही असल दीन है, तथा तक़लीद का खण्डन किया गया है और उस से उपेक्षा करने पर बल दिया गया है।

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    आज लाखों करोड़ों आदमी आग का ईंधन बनने की होड़ में लगे हुए हैं, और ऐसे मार्ग पर चल रहे हैं जो सीधे नरक की ओर जाता है। इस वातावरण में उन तमाम लोगों का दायित्व है जो मानव समूह से प्रेम करते हैं और मानवता में आस्था रखते हैं कि वे आगे आयें और नरक में गिर रहे इंतानों को बचाने का अपना कर्तव्य पूरा करें। यह पुस्तिका इसी संदर्भ में एक अहम प्रयास है जिस में लेखक ने मानवता के प्रति अपने प्रेम और स्नेह के कुछ फूल प्रस्तुत किये हैं और इसके माध्यम से उन्हों ने अपना वह कर्तव्य पूरा किया है जो एक सच्चे मुसलमान होने के नाते हम सब पर है। इस्लाम की दौलत एक बहुत बड़ा धरोहर है जिसे हर एक तक पहुँचाना प्रत्येक सच्चे मुसलमान का कर्तव्य है।

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    इस्लाम धर्म एक संपूर्ण व्यापक धर्म है जो जीवन के सभी छेत्रों को घेरे में लिये हुये है। मानव जीवन का कोई ऐसा छेत्र नहीं है जिसके बारे में इस्लाम के अंदर कोई मार्गदर्शन मौजूद न हो। प्रस्तुत लेख में इस्लामी शिष्टाचार के कुछ पहलुओं को उजागर किया गया है जिन से सुसज्जित होने का इस्लाम ने मुसलमानों को आदेश किया है, उदाहरण स्वरूप खान-पान के आदाब, सोने जागने के आदाब, बैठक और सभा के आदाब, शौच के आदाब, यात्रा के आदाब...इत्यादि।

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    इस लेख में अल्लाह के अन्तिम पैग़म्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के जीवन चरित्र और आप के अतिरिक्त अन्य भूतपूर्व ईश्दूतों की जीवनियों, तथा वर्तमान युग में प्रचलित अन्य धर्मों और मतों के प्रस्थापकों की जीवनियों और उनके सिद्धान्तों की तुलना करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि पूरे मानव इतिहास में आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के सिवाए कोई ऐसी व्यक्तित्व नहीं है जिस की जीवनी सर्व संसार के लिए रहती दुनिया तक आदर्श जीवन का नमूना और अनुकरण के योग्य हो।

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    इस लेख में रमज़ान के महीने में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के व्यवहार का उल्लेख निम्न बिन्दुओं में किया गया हैः 1-रोज़े की अनिवार्यता. 2-इस महीने में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का अधिक से अधिक उपकसना करना. 3-रमज़ान महीने के सबूत और उस से निकलने में आप का तरीक़ा. 4- सेहरी और इफ्तार में आप का तरीक़ा. 5-रोज़ेदार के शिष्टाचार. 6-रमज़ान में यात्रा करने में आप का व्यवहार. 7-भूल कर खाने या पीने वाले की बाबत आप का व्यवहार. 8-रोज़ा तोड़ने वाली चीज़ें. 9- एतिकाफ में आप का तरीक़ा।

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    इस्लाम के पैग़म्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के शीर्षक पर एक न्याय प्रिय हिन्दू दार्शनिक प्रोफेसर के. स. कृष्णाराव द्वारा लिखी गई इस पुस्तक में इस्लाम के पैग़म्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के जीवन चरित्र को रेखांकित किया गया है।

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